Covid-19 Update

58,457
मामले (हिमाचल)
57,233
मरीज ठीक हुए
982
मौत
11,046,432
मामले (भारत)
113,097,102
मामले (दुनिया)

शहीद की पत्नी बोली, फौजियों को बंदूक चलाने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है

शहीद की पत्नी बोली, फौजियों को बंदूक चलाने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है

- Advertisement -

Sukma Naxalite Attack Martyr : मंडी। देश सेवा की कसम खिला दी और हाथों में बंदूक दे दी, लेकिन उसे चलाने के लिए सौ बार सोचना पड़ता है। सुकमा नक्सली हमले के शहीद सुरेंद्र कुमार की पत्नी किरण ने फौजियों की विवशता के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। किरण का कहना है कि केंद्र सरकार ने फौजियों को हाथों में बंदूक देकर सिर्फ कठपुतली बनाकर रखा है, जबकि उन्हें इसके इस्तेमाल के लिए सौ बार सोचना पड़ता है।

नक्सलवाद और आतंकवाद के खिलाफ केंद्र की रणनीति पर उठाए सवाल

मंडी जिला के नेरचौक कस्बे के शहीद सुरेंद्र कुमार की पत्नी ने आए दिन हो रही फौजियों की शहादत पर अपनी प्रतिक्रिया देकर भारत सरकार की नक्सलवाद और आतंकवाद के खिलाफ अपनाई जा रही रणनीति पर सवाल उठाए हैं। बता दें कि सुरेंद्र कुमार हाल ही में छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए नक्सलियों के कायरतापूर्ण हमले में शहादत का जाम पी चुके हैं। पति की शहादत के गम को दिल में छिपाए शहीद सुरेंद्र कुमार की पत्नी किरण में इस बात को लेकर दुख है कि भारत सरकार नक्सलवाद और आतंकवाद से निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।

नक्सली गतिविधियों के बारे में दी पूरी जानकारी

किरण के अनुसार बीती 10 अप्रैल तक छुट्टियां काटने आए उनके पति ने सुकमा में चल रही नक्सली गतिविधियों के बारे में उसे पूरी जानकारी दी थी। सुरेंद्र ने अपनी पत्नी को बताया था कि नक्सली महिलाओं और बच्चों का सहारा लेकर नक्सलवाद को बढ़ावा देते हैं और फौजी चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते। वहीं दूसरी तरफ नक्सली और आतंकी आए दिन फौजियों को अपना निशाना बनाकर उन्हें शहीद कर रहे हैं। किरण के अनुसार फौजियों को भारत सरकार ने कठपुतली बनाकर रख दिया है। हाथों में बंदूक तो दे दी हैं लेकिन फौजियों को उनका इस्तेमाल करने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है। किरण ने भारत सरकार से नक्सलवाद और आतंकवाद के प्रति अपनी रणनीति बदलने की मांग उठाई है ताकि इसके कारण फिर किसी के घर मातम न छा सके। शहीद सुरेंद्र कुमार के बड़े भाई जितेंद्र कुमार ने भारत सरकार को नक्सलवाद पर सर्जिकल स्ट्राइक करने की सलाह दी है। जितेंद्र कुमार के अनुसार यदि समय रहते नक्सलवाद पर लगाम नहीं लगाई गई तो भविष्य में इसे समाप्त कर पाना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन हो जाएगा।

ये भी पढे़ं : सुकमा में शहीद हिमाचली जवानों के परिजनों को मिलेंगे 20-20 लाख

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है