सुंदरकांड पाठ : बिगड़े काम बनाए, हर मुश्किल से मुक्ति दिलाए

सुंदरकांड पाठ : बिगड़े काम बनाए, हर मुश्किल से मुक्ति दिलाए

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हनुमान चालीसा का पाठ व्यक्ति का हर किष्ट मिटा सकता है। इसको पढ़ने से जो भी लाभ मिलते हैं उसके बारे में तो आप जानते ही हैं लेकिन सुंदरकांड का पाठ करने से बड़ी से बड़ी मुश्किलों का हल निकाला जा सकता है। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार सुंदरकांड का पाठ (Sunder kand path) करने वाले भक्त की मनोकामना जल्द पूरी हो जाती है। सुंदरकांड में भगवान राम के परम भक्त हनुमान के गुणों और उसकी विजय की बात बताई गई है।

सुंदरकांड का पाठ करने वाले भक्त को हनुमान जी (Lord hanuman) बल प्रदान करते हैं। उसके आसपास भी नकारात्मक शक्ति भटक नहीं सकती। यह भी माना जाता है कि जब भक्त का आत्मविश्वास कम हो जाए या जीवन में कोई काम न बन रहा हो तो सुंदरकांड का पाठ करने से सभी काम अपने आप ही बनने लगते हैं। किंतु केवल शास्त्रीय मान्यताओं ने ही नहीं, विज्ञान ने भी सुंदरकांड के पाठ के महत्व को समझाया है। विभिन्न मनोवैज्ञानिकों की राय में सुंदरकांड का पाठ भक्त के आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति को बढ़ाता है।

किसी बड़ी परीक्षा में सफल होना हो तो परीक्षा से पहले सुंदरकांड का पाठ अवश्य करना चाहिए। विद्यार्थियों को सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। यह पाठ उनके भीतर आत्मविश्वास को जगाएगा और उन्हें सफलता के और करीब ले जाएगा। आपको शायद मालूम न हो, लेकिन यदि आप सुंदरकांड के पाठ की पंक्तियों के अर्थ जानेंगे तो आपको यह मालूम होगा कि इसमें जीवन की सफलता के सूत्र भी बताए गए हैं। यहां तक कि यह भी कहा जाता है कि जब घर पर रामायण पाठ रखा जाए तो उस पूर्ण पाठ में से सुंदरकांड का पाठ घर के किसी सदस्य को ही करना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक शक्तियों का प्रवाह होता है। यदि स्वयं यह पाठ न कर सकें, तो कम से कम घर के सभी सदस्यों को यह पाठ सुनना जरूर चाहिए।

सुंदर कांड का पाठ विशेष रूप से शनिवार तथा मंगलवार को करने से सभी संकटों का नाश हो जाता है, परंतु आवश्‍यकता होने पर इसका पाठ कभी भी किया जा सकता है। पाठ करने से पहले भक्‍त को स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के निकट किसी मंदिर घर पर एक चौकी पर हनुमान जी की तस्‍वीर विराजमान कर स्‍वयं एक आसान पर बैठ जाएं। इसके बाद बजरंग बली की प्रतिमा को फूल फल चंदन आदि पूजन सामग्री अर्पण करें।

यदि किसी हनुमान मंदिर में पाठ कर रहे हों तो उसकी हनुमान प्रतिमा को चमेली का तेल मिश्रित सिंदूर भी चढ़ा सकते हैं। देसी घी का दीपक जलाना चाहिए। इसके बाद भगवान श्री गणेश, शंकर पार्वती भगवान राम सीता लक्ष्‍मण तथा हनुमान जी को प्रणाम कर गुरुदेव तथा पितृदेवों का स्‍मरण करें। तत्‍पश्‍चात हनुमानजी को मन ही मन ध्‍यान करते हुए सुंदरकांड का पाठ आरंभ करें। पूर्ण होने पर हनुमान जी की आरती करें, प्रसाद चढ़ाएं तथा वहां मौजूद सभी लोगों में बांटे। आपके सभी बिगड़े हुए काम तुरंत ही पूरे होंगे।

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