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वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, टीवी पर बहस अधिक प्रदूषण पैदा कर रही है

वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाने के लिए आपात बैठक बुलाने को कहा

वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, टीवी पर बहस अधिक प्रदूषण पैदा कर रही है

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अदालत से जुड़े मामलों को लेकर टेलीविजन पर बहस के कंटेन्ट पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि टीवी पर बहस किसी भी चीज की तुलना में अधिक वायु प्रदूषण पैदा कर रही है। सुनवाई की शुरूआत में, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश एनवी रमणा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया कि केंद्र सरकार ने अदालत को पराली जलाने, सर्दियों में 4 प्रतिशत और गर्मियों में 7 प्रतिशत के सटीक योगदान पर गुमराह नहीं किया और रिपोर्ट में डेटा वार्षिक औसत पर आधारित था। मेहता ने कहा कि पराली जलाने से संबंधित आंकड़ों के संबंध में टीवी स्टूडियो में बहस के दौरान कुछ भद्दे बयान दिए गए।जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और सूर्यकांत की पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि इसे गुमराह नहीं किया गया है।पीठ ने कहा, “हमें बिल्कुल भी गुमराह नहीं किया गया था। आपने 10 प्रतिशत कहा था लेकिन हलफनामे में यह बताया गया था कि यह 30 से 40 प्रतिशत (अनुबंध में) था। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “इस तरह की आलोचनाएं होती रहती हैं। हमारी अंतरात्मा साफ है और हम जनहित के लिए काम करते हैं।उन्होंने आगे कहा कि “टीवी पर बहस बाकी सभी की तुलना में अधिक प्रदूषण पैदा कर रही है, हमें एक संकल्प पर काम करने पर ध्यान देना चाहिए।”दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण के संबंध में किसानों द्वारा पराली जलाने के केंद्र के आंकड़ों पर तर्क दिया।

सरकार के कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए नहीं कह सकती

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में कहा है कि वह केंद्र सरकार के कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए नहीं कह सकती क्योंकि कोविड महामारी के बाद कार्यालयों में कामकाज सामान्य होता जा रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में वर्क फ्रॉम होम के बदले कार पूलिंग का सुझाव दिया गया है। केंद्र ने एक हलफनामे में कहा कि एनसीआर में केंद्र सरकार के कारोबार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों की संख्या बहुत महत्वपूर्ण नहीं थी, इसलिए “केंद्र सरकार ने फैसला किया कि केंद्र सरकार के कार्यालयों के कामकाज के हालिया सामान्य होते हालात को देखते हुए, कोविड की महामारी के बाद, वर्क फ्रॉम होम डायरेक्शन न पास करने का फायदा वर्क फ्रॉम होम डायरेक्शन से मिलने वाले फायदों से अधिक होगा।”

 

–आईएएनएस

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