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प्लास्टिक सामग्री को निपटाना कठिन कार्य, समस्या को गंभीरता से लेना जरूरी

प्लास्टिक सामग्री को निपटाना कठिन कार्य, समस्या को गंभीरता से लेना जरूरी

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शिमला। प्लास्टिक प्रदूषण (Pollution) हमारे पर्यावरण को तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है। प्लास्टिक सामग्री को निपटाना कठिन कार्य है और पृथ्वी पर प्रदूषण को बढ़ाने में बड़ा योगदान देता है। यह बड़ी चिंता का कारण बन गया है। यह समय है कि हमें इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए और इसे मिटाने की दिशा में काम करना चाहिए। यह बात सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने भारत के “ न्यायालयों की प्रदूषण को रोकने में संवैधानिक भूमिका” विषय पर बोलते हुए अपने संबोधन में कही। बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा प्रदेश हाईकोर्ट (State High Court) के वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय लाला अमर चंद सूद की याद में हाईकोर्ट सभागार में स्वर्गीय लाला अमर चंद सूद मेमोरियल लेक्चर का आयोजन किया गया। इस विख्यात विषय पर न्यायमूर्ति ललित ने आगे कहा कि न्यायिक व्याख्याओं के अनुसार स्वास्थ्य का अधिकार वातावरण का उत्पाद है। इसी कारण संविधान में पर्यावरण की रक्षा और सुधार हेतु राज्य और नागरिकों पर एक शुल्क लगाया था


उनके अलावा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश दीपक गुप्ता ने भी इस महान व्यक्तित्व के बारे में अपने विचार भी साझा किए हैं। इस अवसर पर संबोधित करते हुए हाईकोर्ट (High Court) के वरिष्ठतम न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी ने कहा भारत की अदालतों ने धीरे-धीरे जीवन और जीवन की गुणवत्ता,अवधारणा के दायरे को बढ़ाया और पर्यावरण को प्रभावित करने वाले पहलूओं पर गौर किया है और आवश्यक रोक लगाई गई। प्रदेश हाईकोर्ट के कुछ निर्णयों का भी हवाला दिया, जिसमें किंकरी देवी समाज सेविका द्वारा पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए हाईकोर्ट के समक्ष दायर की गई याचिका व हाईकोर्ट द्वारा खनन को रोकने के लिए पारित निर्णय का विशेष तौर पर उल्लेख किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि स्वर्गीय लाला अमर चंद सूद एक महान इंसान थे और एक कानूनी विद्वान थे।

उच्च न्यायालय के पहले वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय लाला अमर चंद सूद एक प्रख्यात वकील, परोपकारी और सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। वह 1906 में पैदा हुए थे और 1941 में उन्होंने विभिन्न न्यायालयों में वकालत शुरू की। वह बार काउंसिल ऑफ हिमाचल प्रदेश (Council of Himachal Pradesh) के अध्यक्ष के रूप में भी रहे। उन्होंने 100 वर्ष की उम्र तक वकालत जारी रखी और वर्ष 2009 में 103 वर्ष की आयु में उनका देहांत हो गया। स्वागत भाषण वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल देव सूद द्वारा दिया गया, जोकि स्वर्गीय लाला अमर चंद सूद के पुत्र हैं। प्रदेश महाधिवक्ता अशोक शर्मा व बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Association of India) के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने भी इस अवसर पर संबोधित किया। अध्यक्ष, बार काउंसिल ऑफ हिमाचल रमाकांत शर्मा ने भी इस अवसर पर संबोधित करते हुए लाला जी को याद किया। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव जीवन ने मुख्यातिथि व अन्यों का इस अवसर पर आने के लिए धन्यवाद किया।

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