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जिद की, भाग्य बदला, अब दूसरों का बनी सहारा

जिद की, भाग्य बदला, अब दूसरों का बनी सहारा

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मंडी। कहते हैं भाग्य भी बदल जाता है बस जरूरत कड़ी मेहनत और सच्ची लगन की होती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है, मंडी जिला के करसोग की ग्राम पंचायत नांज की सुषमा वर्मा ने। एक समय था जब सुषमा वर्मा, अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को भी बड़ी मुश्किल से पूरा कर पाती थी। कड़ी मेहनत ने आज उसे आत्मनिर्भर बना दिया है। यहीं नहीं, सुषमा ने अपनी पंचायत की सात-आठ युवतियों को स्वावलंबी बनाने की राह दिखाई है।

  • करसोग की सुषमा ने मेहनत के दम पर पाया मुकाम
  • हर महीने कमा रही 20 से 25 हजार रुपये

mandi-2बताते चलें कि नांज गांव की  सुषमा वर्मा का जन्म एक निर्धन वर्गीय परिवार में हुआ । माता-पिता खेती बाड़ी व मेहनत- मजदूरी से अपना तथा परिवार का जीवन यापन करते थे। सुषमा को पढ़ने की चाह ने आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। पढ़ाई के शौक में गुरबत भी अपना रंग नहीं जमा सकी और जैसे- तैसे उसके माता-पिता ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला करसोग से दस जमा दो की शिक्षा तो दिलाई, लेकिन उच्च शिक्षा के लिए उनके पास कोई सहारा नहीं था। सुषमा की जिद ने माता-पिता को स्नातक की पढ़ाई करवाने के लिए भी मजबूर कर दिया। उसने स्नातक की पढ़ाई करने के बाद परिवार का सहारा बनने के लिए रोजगार की तलाश की तथा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बैंक से 4 प्रतिशत ब्याज की दर से स्वेटर बनाने तथा सिलाई की मशीनें  खरीदने और फिर खुद का काम करने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया। कपड़े सिलने व उनसे बने स्वेटर, जुराबें, बच्चों की टोपियां जैसे वस्त्र बनाने शुरू किए। जिससे उसने प्रतिदिन 150 से 200 रुपये की आय अर्जित करनी शुरू की। धीरे-धीरे कार्य बढ़ता गया और आमदनी में भी इजाफा होने लगा।

nahan-3अब सुषमा वर्मा अपने परिवार का सहारा बन चुकी थी। माता -पिता ने उसके हाथ पीले करने का सपना संजोया। विवाह के उपरान्त भी उसने न केवल यह काम जारी रखा अपितु आस-पड़ोस की युवतियों को भी इस कार्य में प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की राह दिखाई। आज सुषमा वर्मा करसोग बाजार में न केवल व्यवसायिक तौर पर इस कार्य को अपनी मेहनत से पूरा कर रही है, बल्कि 5 युवतियों को इस कार्य में प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर व स्वावलम्बी बनाने के लिए प्रेरित कर रही है। वर्मा आज भी विजय नाम से स्वयं सहायता समूह चला रही हैं तथा प्रतिमाह 20 से 25 हजार रुपये अर्जित कर रही है। वर्मा ने गांव की महिलाओं के करीब 35 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया है। इन स्वयं सहायता समूहों का गठन करके 400 से ज्यादा महिलाओं को छोटे-छोटे कार्य करने में सक्षम बना कर किसी न किसी कार्य में जोड़ा है।  प्रदेश सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को  स्वावलंबी बनाने के लिए न केवल बैंकों से 4 प्रतिशत की दर से वित्तीय सहायता प्रदान करती है बल्कि कौशल विकास के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण भी प्रदान करती है। समूहों के कौशल को बढ़ाने के लिए नावार्ड की सहायता से माहूनाग, शोरसन, न्यारा, ममेल, काणींमदड़ाह, बगैला, चैंरीधार, मैंडी, सेरी  कलाशन, वही सरही तथा परलोग में 450 महिलाओं को समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है। महिलाओं को कोटी स्वैटर, लेडिज पर्स, अचार, जैम-चटनी, ब्रास का जैम, बांस की टोकरियां बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है ताकि उनके द्वारा बनाया गया सामान समय पर बेच कर उनकी आर्थिकी में सुधार हो सके। करसोग उपमंडल में वर्तमान में कुल 900 स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न बैंकों से जोड़कर 2 करोड़ का ऋण छोटे-छोटे कार्य को करने के लिए प्रदान किया है।

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