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शिमला के बंदरों के आगे हारे यूपी और राजस्थान, काबू करने में रही नाकाम

शिमला के बंदरों के आगे हारे यूपी और राजस्थान, काबू करने में रही नाकाम

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शिमला। यूपी और राजस्थान के वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों की टीम भी राजधानी शिमला को खूंखार बंदरों से निजात नहीं दिला पाई है। बंदरों के आतंक से निपटने के लिए वन विभाग की वाइल्डलाइफ विंग पिछले तीन साल में कई तकनीक अपना चुकी है, लेकिन नाकामी ही मिली है। अब बंदरों की नसबंदी के टारगेट पर नजर है।शिमला को बंदरों से निजात दिलाने अक्टूबर में यूपी और राजस्थान की वाइल्डलाइफ टीम अक्टूबर में यह पता करने शिमला आई थी कि हिमाचल को बंदरों से कैसे निजात मिल सकती है। दोनों राज्यों की टीमों को राज्य की वाइल्ड लाइफ विंग ने बुलाया था। उन्हें कहा गया था कि वे बंदरों के ग्रुप और उनके रहने के प्रमुख अड्डों को खत्म करे, लेकिन टीम इस काम में नाकाम रही।

2016 से नहीं मार पाए एक भी बंदर

पिछले दो साल से नगर निगम शिमला सहित प्रदेश की 38 तहसीलों में बंदरों को मारने की अनुमति दी गई थी, लेकिन एक भी बंदर नहीं मारा गया। 2015 की गणना में पता चला कि प्रदेश में 2 लाख 7 हजार बंदर हैं। इनमें से से 1 लाख 70 हजार बंदरों की नसबंदी हो चुकी है। पिछले साल 20 हजार बंदरों की नसबंदी हुई। इस बार भी वन विभाग ने 20 हजार बंदरों की नसबंदी का टारगेट फिक्स किया है, जो 31 दिसंबर तक पूरा होना है। वर्ष 2016 में नगर निगम शिमला के दायरे में खूंखार बंदरों को मारने की अनुमति केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने दी थी। यहां तक कि दो बार एक्सटेंशन भी मिली थी।


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