जैसलमेर किले की आभा है नायाब, आज भी बिना पैसे दिए रह रहे लोग

12वीं शताब्दी में स्थानीय नेता रावल जैसल ने बसाया था यह शहर

जैसलमेर किले की आभा है नायाब, आज भी बिना पैसे दिए रह रहे लोग

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145अगर आप ऐतिहासिक चीजों को देखने के शौकीन हैं तो राजस्थान आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यहां कई ऐतिहासिक किले हैं जो अपनी आभा लिए आज भी आने वालों को आकर्षित करते हैं और उनके मानस पटल पर भविष्य की सुनहरी यादों को संजो देते हैं। राजस्थान (Rajasthan) में पांच किले हैं जो बहुत ही ज्यादा फेमस हैं। ये यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट (UNESCO World Heritage Site) में शामिल हैं।


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इन्हीं में जैसलमेर का किला भी शामिल है। इस किले में कुछ हवेलियां हैं। इनमें पटवाओं की हवेली, नथमल की हवेली, सलाम सिंह की हवेली (Patwaon ki Haveli, Nathmal ki Haveli, Salam Singh ki Haveli) आदि शामिल हैं। भारत में बहुत ही कम ऐसे फोर्ट हैं जहां एक साथ राजपुताना और इस्लामी शैली (Rajputana and Islamic style) एक साथ देखने को मिले।

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जैसलमेर के इस किले का निर्माण लगभग 800 साल पहले हुआ था। यहां आज भी दो हजार से से चार हजार तक लोग बिना पैसे दिए रहते हैं। इन लोगों के पूर्वज भी पहले इस किले में रहते थे। बताया जाता है कि उस समय के राजाओं ने यहां रहने वाले लोगों के पूर्वजों को उनकी सेवा के बदले जमीन दी थी। जैसलमेर की स्थापना 12वीं शताब्दी में स्थानीय नेता रावल जैसल ने की थी। उन्होंने ही इस शहर का नामकरण किया था। यह पूरा किला बलुआ पत्थर से बनाया गया है। यह देखने में बेहद खूबसूरत लगता है। लोग यहां विशेषकर सूर्यास्त देखने के लिए आते हैं। आज जैसलमेर (Jaisalmer) के किला में छोटी-छोटी चाय की दुकानें, कैफे, गेस्ट हाउस और घर देखने को मिलेंगे। स्थानीय लोग, विशेष रूप से किले के अंदर रहने वाले पर्यटकों से पैसा कमाते हैं।

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