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देश की इकलौती नदी जो नहीं मिलती सागर में, इस जगह जाकर सूख जाता है पानी

लोगों के लिए है यह नदी सिंचाई का स्त्रोत

देश की इकलौती नदी जो नहीं मिलती सागर में, इस जगह जाकर सूख जाता है पानी

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नई दिल्ली। पहाड़ों से निकलकर सागर में मिलना हर नदी की प्राकृतिक क्रिया होती है। लेकिन देश में इकलौती ऐसी नदी भी है जो पहाड़ों से निकलने के बाद सागर में नहीं मिलती, बल्कि एक जगह जाकर इस नदी का पानी सूख जाता है। लूनी नाम से प्रसिद्ध इस नदी का पानी 100 किमी की दूरी के बाद बिना सागर में मिले खारा हो जाता है। 
लूनी नामक यह नदी अरावली पर्वत के निकट आनासागर से उत्पन्न होती है। वहां से दक्षिण पश्चिम क्षेत्र में बहते हुए यह नदी कच्छ के रन में जाकर मिलती है। इस नदी का उद्गम अजमेर जिले में 772 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नाग की पहाड़ियों से होता है। 495 किमी की लंबाई वाली यह नदी अजमेर से निकल कर दक्षिण-पश्चिम राजस्थान नागौर, जोधपुर, पाली, बाड़मेर, जालौर ज़िलों से होकर बहती हुई गुजरात के कच्छ मैदान में जाकर सूख  जाती है। इतना ही नहीं, हैरान कर देने वाली बात यह है कि बाड़मेर से गुजरने के बाद यह नदी खारी हो जाती है। हालांकि इसके पीछे की कारण यह है कि रेगिस्तान क्षेत्र से गुजरने पर रेत में मिले नमक के कण पानी में मिल जाते हैं। आपको बता दें कि राजस्थान के कई जिलों में लूनी नदी सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। यही वजह है यहां के लोग इसकी पूजा भी करते हैं। 

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