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शिमलाः अभी तक चुनाव आयोग के पास नहीं पहुंचा पार्षद का इस्तीफा

शिमलाः अभी तक चुनाव आयोग के पास नहीं पहुंचा पार्षद का इस्तीफा

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लेखराज धरटा, शिमला। नगर निगम शिमला के सांगटी वार्ड की पार्षद मीरा शर्मा का इस्तीफा अभी तक राज्य निर्वाचन आयोग नहीं पहुंचा। हालांकि नियमों के मुताबिक पार्षद पद से इस्तीफा देने के कुछ दिन बाद संबंधित निकाय का दायित्व बनता है कि वह इस्तीफे की सूचना निर्वाचन आयोग को दें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बताया गया कि गत सितंबर महीने में मीरा शर्मा ने पद से इस्तीफा दे दिया था। हैरानी की बात है कि करीब तीन महीने बीतने को है, लेकिन अभी तक राज्य निर्वाचन आयोग को अवगत नहीं करवाया।
राज्य निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक जब तक नगर निगम की ओर से लिखित सूचना नहीं मिलती तब तक उप चुनाव करवाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक किसी पद के खाली होने या इस्तीफा देने के छह महीने के भीतर राज्य निर्वाचन आयोग को उप चुनाव करवाना पड़ता है। इस समय आयोग की नजरों में पार्षद मीरा शर्मा ने पद से इस्तीफा नहीं दिया। उल्लेखनीय है कि मीरा शर्मा सांगटी वार्ड से कांग्रेस समर्थित पार्षद हैं। हालांकि इससे पहले वे माकपा से भी पार्षद रह चुकी हैं, लेकिन पिछले साल हुए नगर निगम के चुनाव में उन्होंने माकपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुई। कांग्रेस ने मीरा को ही सांगटी वार्ड से टिकट दिया और जीत भी गई। नगर निगम शिमला में कांग्रेस समर्थित 12 पार्षद हैं। मीरा शर्मा के इस्तीफा के बाद अब 11 ही रह गए हैं। बताया गया कि मीरा शर्मा ने सितंबर महीने में नगर निगम आयुक्त को इस्तीफा सौंप दिया था। ऐसे में जब तक राज्य निर्वाचन आयोग के पास पूरी डिटेल नहीं आती तब तक  उप चुनाव की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकती। गौरतलब है कि मीरा शर्मा ने अपने निजी कारणों से ही पार्षद से इस्तीफा दे दिया था।

नगर निगम प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली

नगर निगम शिमला की सुस्त कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठ रहे हैं। मात्र 34 पाषदों की संख्या वाले नगर निगम से इस्तीफा देने की सूचना राज्य निर्वाचन आयोग को देने में भी नाकाम साबित हुआ। यहां तक कि शहरी विकास विभाग ने भी इसकी सूचना निर्वाचन आयोग को नहीं दी। ऐसे में साफ जाहिर है कि नगर निगम शिमला और शहरी विकास विभाग में कम्यूनिकेशन गैप के कारण ही पार्ष के एक खाली पद को भरने की कवायद भी शुरू नहीं हो पाई। भले ही एक पद से कांग्रेस या बीजेपी के लिए बहुमत का समीकरण नहीं बदल सकता है, मगर राजनीतिक दृष्टि से यह काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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