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क्या है आखिर ध्यान में प्रकाश का रहस्य 

क्या है आखिर ध्यान में प्रकाश का रहस्य 

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ध्यान करते समय प्रकाश का दिखाई देना एक अलौकिक अनुभूति है वह भी ऐसी  कि इसे देखने वाला पल भर के लिए चमत्कृत रह जाता है। अनुभवों के आधार पर पाया गया है कि ध्यान करते समय अनेक प्रकार की रोशनियां दिखाई देती हैं।  किसी-किसी को प्रारंभ में ठीक मस्तक के बीच में एक तेज प्रकाश दिखाई देता है जो पिन की नोक के बराबर होता है।  यह शरीर का अग्निचक्र है। हमारी आंखें बंद होती हैं पर सामने प्रकाश के अनेकों रंग हमारे सामने होते हैं । सफेद, नीला, पीला,हरा,और लाल अथवा धुएं के रंग का प्रकाश हमें बांध सा लेता है। यही नहीं ,कभी तो सारे रंग मिले जुले दिखते हैं और कभी बिजली जैसी चमक दिखती है। यह हमारा मानसिक क्षितिज है और इसमें किसी-किसी को चांद -सूरज या फिर तारामंडल के दर्शन भी हुए हैं। ध्यान करते समय दिखने वाली इस रोशनी को तन्मांत्रिक प्रकाश कहते हैं। जब भी ऐसी रोशनी दिखे तो समझ लीजिए कि आप साधना के मार्ग पर प्रगति की ओर अग्रसर हैं।
लगातार अभ्यास करते रहने पर कुछ ही महीनों में प्रकाश का दायरा बड़ा होता जाएगा। यह एकदम सफेद प्रकाश होगा और ऐसे दिखेगा ,मानों तेज सूरज चमक रहा हो। यह रोशनी स्थिर नहीं होगी बल्कि दिखने के बाद शीघ्र ही गायब हो जाएगी। जब भी रोशनी दिखे, तो भरसक आप हिलें-डुलें नहीं बल्कि स्थिर भाव से आसन पर बैठे रहिए। अगर प्रति दिन सुबह और शाम तीन घंटे का अभ्यास किया जाए तो ऐसे दृश्य दिखेंगे कि पराशक्तियों पर मन दृढ़ हो जाएगा। कभी -कभी साधना के दौरान इतना तीव्र प्रकाश दिखता है कि आप उसे सहन नहीं कर पाते और आंखें खोल देते हैं। यह प्रकाश सुषुम्ना से आता हुआ प्रकाश है। इस रोशनी में  सुंदर दैवी आकृतियां दिखती हैं । सुंदर फूलमालाएं, व स्त्राभूषण पहने देवता, संगीत की ध्वनि ,हाथों में सुंदर वाद्य लिए अप्सराएं या फिर दिशा निर्देश देते हुए सिद्ध ऋषि-मुनि दिखाई देते हैं।
यही नहीं, ऊंचे पहाड़,नदियां, बादल और स्वर्णिम मंदिरों का भी दर्शन हुआ है। यह स्वप्न नहीं होता बल्कि अपनी जाग्रत अवस्था में आप यह सब देखते हैं  क्योंकि उस समय आपकी चैतन्यता अत्यंत मुखर होती है। आवश्यकता है ध्यान के निरंतर अभ्यास की। ऐसे में तब आश्चर्य होता है , जब आप सोने की कोशिश में होते हैं तो अचानक ही ये रोशनियां  बिना किसी प्रयास के अपने आप सामने प्रकट हो जाती हैं। एक दिन ऐसा भी लगने लगता है कि रोशनियां हर समय आपके साथ रहती हैं।  निरंतर अभ्यास करने वाला साधक कुछ ही दिनों बाद स्वयं महसूस करने लगता है कि कोई अदृश्य शक्ति उसकी सहायता कर रही है और उसकी समस्याओं का समाधान होता जा रहा है।

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