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य़हां मौत के बाद भी करवाई जाती है शादी …

य़हां मौत के बाद भी करवाई जाती है शादी …

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जिंदा लोगों की शादी के बारे में आपने काफी सुना और देखा होगा लेकिन क्या कभी आपने मुर्दा लोगों की शादी के बारे में सुना है। जी हां…मुर्दा लोगों की शादी। अब आप सोचेंगे कि मुर्दा लोगों की भी शादी होती है क्या तो आपको बता दें कि मेरठ के खरखौदा की एक बस्ती में ऐसा हकीकत में होता है। यहां सदियों से यह परंपरा चली आ रही है कि इलाके के मृत बच्चों की बालिग होने के समय पर शादी करवाई जाती है।
उल्धन गांव की मंढैया में चार बच्चों की शादी परंपरा के अनुसार धूमधाम से करवाई गई। दूल्हा-दुल्हन की जगह मृतक बच्चों की फोटो रखी गईं और उनका पूरा पूरा श्रंगार किया गया। बाकायदा बारात निकाली गई और दावत नाच-गाना भी हुआ। मौत के वक्त बच्चों की उम्र पांच और छह साल थी। यहां के राजबीर की बच्ची रूपा का निधन करीब 17 साल पहले पांच वर्ष की उम्र में हो गया था। राजबीर के पड़ोसी मुनेश की बेटी पायल की मृत्यु भी इसी दौरान हुई थी। दूसरी ओर, भावनपुर के आलमपुर गांव निवासी गोविंदा और अक्षय के पुत्र का मौत भी छह साल की उम्र में हो गई थी। आलमपुर गांव से बाराती दोनों मृत बच्चों के फोटो को दूल्हे की तरह सजाकर मंढैया पहुंचे। यहां दोनों बच्चियों के परिवारों में शादी की रस्में निभाई गईं। ढोल और डीजे का इंतजाम किया गया था और पंडाल लगाकर दावत की भी व्यवस्था की गई। पूरी बस्ती के साथ रिश्तेदारों को भी इसमें आमंत्रित किया गया। चढ़त हुई तो बाराती दोनों बच्चों के फोटो पर सेहरा लगाकर पहुंचे। वहीं बच्चियों के फोटो दुल्हन के रूप में सजाकर शादी की रस्में पूरी की गईं। इसके बाद बारातियों और रिश्तेदारों ने भोज ग्रहण किया।
बारात में शामिल बुजुर्गों का कहना है कि यह परंपरा काफी समय पहले से चली आ रही है। वे ऐसा इसलिए करते हैं क्यों कि उनका मानना है कि बचपन में भगवान को प्यारे होने वाले बच्चे हमेशा उनके साथ रहते हैं। उनकी शादी भी उसी उत्सुकता से इंतजार किया जाता है जितना कि जिंदा लोगों की शादी का। इसकी तैयारी भी काफी समय पहले सी होती है। 

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