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BPL हूं : घर के बाहर नहीं लगने दूंगा पट्टिका

BPL हूं : घर के बाहर नहीं लगने दूंगा पट्टिका

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गफूर खान/धर्मशाला। बीपीएल सूची में धांधली होने और पात्रों के स्थान पर अपात्र परिवारों के चयन की शिकायतों से निपटने के लिए, प्रदेश सरकार ने बीपीएल सूची में शामिल परिवारों के घरों के बाहर बीपीएल पट्टिका लगाने का निर्णय लिया था।सरकार के इस निर्णय के बाद प्रदेशभर में सैकड़ों अपात्र लोग जो साधन सम्पन्न होने के बावजूद इस श्रेणी का लाभ ले रहे थे, इस सूची से बाहर भी हुए हैं। 


  • कहा, गरीब हूं तो क्या सम्मान से जीने का अधिकार नहीं
  • प्रशासन के पट्टिका लगाने के कई प्रयास रहे बेनतीजा

बीपीएल सूची में शामिल अधिकतर परिवारों के मकानों के बाहर बीपीएल पट्टिकाएं लगाई भी जा चुकी हैं, लेकिन पूरे प्रदेश में एक परिवार ऐसा भी है जो कि बीपीएल सूची में तो है, पर अपने मकान के बाहर बीपीएल पट्टिका लगवाने से इंकार कर रहा है। यह मामला जिला कांगड़ा के विकास खंड कांगड़ा में सामने आया है।

प्रशासन ने उस मकान के बाहर कई बार यह पट्टिका लगाने का प्रयास भी किया, लेकिन हर बार विरोध का सामना करना पड़ा और नतीजतन प्रशासन के अब तक के सभी प्रयास बेनतीजा ही रहे। अपनी तरह के इस मामले के बाद प्रशासन भी पशोपेश में है। इस बारे में जब हिमाचल अभी अभी ने उक्त परिवार के मुखिया से संपर्क किया तो परिवार के मुखिया का कहना था कि गरीब हूं तो क्या हुआ, लेकिन सम्मान के साथ जीने का हक उन्हें भी है। यह हक देश के संविधान ने उन्हें दिया है और उसी हक के तहत वह अपने घर के बाहर यह पट्टिका नहीं लगवाने दे रहे हैं। उनका तर्क है कि पट्टिकाएं लगाने से गरीबों की पहचान करना उनकी गरीबी का मजाक उड़ाने जैसा है। सरकार ने बीपीएल परिवारों की पहचान करने की जो प्रक्रिया अपनाई है वह भी कारगर नहीं है। साधन संपन्न लोगों ने अपनी गौशालाओं के बाहर यह पट्टिकाएं लगवाकर सरकार को गुमराह करने का काम किया है। ऐसे लोगों का यह कदम सरकार की इस योजना की प्रासंगिकता को आईना दिखाने के लिए काफी है। सरकार की नाक के नीचे हेराफेरी करने वाले लोग गौशालाओं और अपने पुराने मकानों के बाहर यह पट्टिका लगवाकर गरीबों का ही मजाक उड़ा रहे हैं। इस परिवार के मुखिया का कहना है कि सरकार बीपीएल पट्टिकाओं के नाम पर गरीबों की भावनाओं को आहत करने का काम कर रही है।

उनका कहना है कि सरकार संगीन अपराधों में शामिल लोगों के घरों के बाहर भी उनके अपराधों और उनको मिली सजा आदि की पट्टिका लगाये तो इससे सुरक्षित समाज को बनाने में बहुत लाभ होगा। समाज में सिर्फ गरीब वर्ग को ही क्यों निशाने पर रखा जाता है, यह उनकी समझ से परे है। यदि सरकार ने अपने इस निर्णय पर गौर नहीं किया तो वह मानवाधिकार आयोग और जरूरत पड़ी तो अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे। इस बारे में डीसी कांगड़ा सीपी वर्मा का कहना है कि सरकार ने बीपीएल सूची में चयन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए यह पट्टिकाएं लगाने का यह निर्णय लिया था। यह किसी की भावनाओं को आहत करने के लिए नहीं किया गया है। जो लोग सही मायने में बीपीएल में हैं उन्हें इस श्रेणी की सुविधाएं प्रदान की जा सकें इसलिए यह योजना चलाई गई हैं। किसी का उपहास उड़ाना या आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने के लिए यह कदम कतई नहीं उठाया गया है। अगर किसी को कोई शिकायत है तो उनके साथ कर सकता है लेकिन जिस योजना का लाभ कोई ले रहा है तो उसकी पट्टिका लगवाने में किसी को कोई शर्म नहीं होनी चाहिए। बीपीएल पट्टिका लगाने से पात्र लोगों का चयन आसानी से हो सकेगा और इस श्रेणी को मिलने वाली सुविधाएं अधिक से अधिक पात्र लोगों को मिल सकें यही सरकार का प्रयास है।

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