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पोकलेन ऑपरेटर मामलाः उम्मीद और परेशानी के आगे प्रशासन बेबस

पोकलेन ऑपरेटर मामलाः उम्मीद और परेशानी के आगे प्रशासन बेबस

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चंबा। खज्जियार मार्ग पर मंगला के पास मलबे में दबे मंडी (Mandi) जिला के पोकलेन ऑपरेटर (Poke lane Operator) का अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। अभी तक रेस्क्यू टीम (Rescue team) पोकलेन मशीन तक भी नहीं पहुंच पाई है। दूसरी तरफ पोकलेन ऑपरेटर के परिजनों में रवि के जिंदा होने की उम्मीद और सात पंचायत के लोगों को पेश आ रही परेशानी के आगे जिला प्रशासन बेबस दिख रहा है। लोग पीडब्ल्यूडी (PWD) सहित जिला प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखो, लेकिन रोड खोल दो। वहीं, पोकलेन ऑपरेटर के परिजन सड़क पर पड़े मलबे को नीचे खड्ड में फैंकने से मना कर रहे हैं, उनका मानना है कि मलबा नीचे फैंकने से पोकलेन ऑपरेटर को ढूंढने में परेशानी होगी।

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हालांकि पिछले कल पीडब्ल्यूडी ने रोड खोल दिया था। चुनाव ड्यूटी (Election Duty) पर लगाई बसों आदि को रोड क्रॉस करवाया था, लेकिन शाम को सड़क पर मलबा गिरने से दोबारा रोड बंद हो गया। आज सुबह काफी जदोजहद के बाद दोबारा रोड खोल दिया गया। मौके पर पहुंचे पीडब्ल्यूडी अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच रोड खोले जाने को लेकर बहसबाजी भी हुई।

 

बता दें कि इस मार्ग के बंद होने से सात पंचायत के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इन पंचायतों के लोग डिपो के राशन पर निर्भर हैं। मार्ग बंद होने से राशन डिपुओं तक नहीं पहुंच पा रहा था। यहां तक दुकानों में सब्जी तक नहीं मिल रही थी। यही नहीं सड़क मार्ग बंद होने से एक महिला की मौत भी हो गई।

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महिला को बीमारी की हालत में पीठ पर उठाकर अस्पताल (Hospital) ले जाया गया, लेकिन महिला की मौत हो गई। ऐसा भी कहा जा रहा है। वहीं, एक गर्भवति महिला को जैसे तैसे कर सुल्तानपुर तक पहुंचाया गया। महिला ने अस्पताल में तीन बच्चों को जन्म दिया। लोगों का कहना है कि अगर महिला को समय रहते अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता तो कुछ भी हो सकता था। इन्हीं परेशानियों के चलते लोगों के सब्र का बांध टूट गया। लोगों की एक ही मांग है कि रेस्क्यू ऑपरेशन भी चले और रोड भी खुला रहा। वहीं, पोकलेन ऑपरेटर रवि के जिंदा होने की उम्मीद में बैठे परिजन पीडब्ल्यूडी पर मदद न करने के आरोप लगा रहे हैं। बहरहाल एनडीआरएफ की टीम (NDRF Team) मलबे में दबी पोकलेन और ऑपरेटर को ढूंढने में लगी है। हादसे को हुए 6 दिन बीत गए हैं। पर अभी तक ऑपरेटर तो दूर पोकलेन मशीन का भी सुराग नहीं लग पाया है।

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