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ये हैं कुंभ मेले की खास स्नान तिथियां …..

कुंभ की शुरुआत मकर संक्रांति से

ये हैं कुंभ मेले की खास स्नान तिथियां …..

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कुंभ मेले में सबसे ज्यादा महत्व है स्नान का। कुंभ का स्नान स्वर्ग का द्वार खोलता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर मनुष्य अपने समस्त पापों को धो डालता है। पवित्र गंगा में डुबकी लगाने से मनुष्य और उसके पूर्वज दोषमुक्त हो जाते हैं। कुंभ मेले में स्नान करना हर व्यक्ति के लिए एक खास आध्यात्मिक अनुभव होता है। प्रमुख स्नान तिथियों पर सूर्योदय के समय साधु-संत पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाते हैं। प्रयागराज में शुरु होने वाला कुंभ मेला 14 जनवरी से मार्च तक चलेगा। कुंभ मेले के दौरान 8 प्रमुख स्नान तिथियां पड़ेंगी। जानते हैं कुंभ के दौरान होने वाली 6 महत्वपूर्ण तिथियों पर होने वाले आयोजनों के बारे में …

मकर संक्रांतिः कुंभ की शुरुआत मकर संक्रांति के दिन पहले स्नान से होगी। इसे शाही स्नान और राजयोगी स्नान के नाम से भी जानते हैं। इस दिन संगम, प्रयागराज पर विभिन्न अखाड़ों के संत की पहले शोभा यात्रा निकलते हैं फिर शाही स्नान का आयोजन होता है। मकर संक्रांति पर सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश होता है। इस दिन स्नान के बाद सूर्य को जल देकर चावल और तिल को स्पर्श कर उसे दान में दिया जाता है। इस दिन कहीं उड़द दाल की खिचड़ी या दही-चूड़ा खाना जरुरी होता है।

पौष पूर्णिमाः 21 जनवरी को पौष पूर्णिमा के दिन कुंभ में दूसरा बड़ा आयोजन होगा। पौष पूर्णिमा के दिन से ही माघ महीने की शुरुआत होती है। कहा जाता है आज के दिन स्नान ध्यान के बाद दान पुण्य करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। वहीं, इस दिन संगम पर सुबह स्नान के बाद कुंभ की अनौपचारिक शुरुआत हो जाती है। इस दिन से कल्पवास भी आरंभ हो जाता है।

पौष एकादशीः पौष एकादशी को कुम्भ में तीसरा बड़े शाही स्नान का आयोजन होगा। 31 जनवरी को स्नान के बाद दान पुण्य किया जाता है।

मौनी अमावस्याः चौथा शाही स्नान मौनी अमावस्या यानि 4 फरवरी को होगा। इसी दिन कुंभ के पहले तीर्थाकर ऋषभ देव ने अपनी लंबी तपस्या का मौन व्रत तोड़ा था और संगम के पवित्र जल में स्नान किया था। इसलिये मौनी अमावस्या के दिन कुंभ मेले में बहुत बड़ा मेला लगता है, जिसमें लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ती है।

बसंत पंचमीः 10 फरवरी को बसंत पंचमी यानि माघ महीने की पंचमी तिथ‍ि को मनाई जायेगी। बसंत पंचमी के दिन से ही बसंत ऋ‍तु शुरू हो जाती है। कड़कड़ाती ठंड के सुस्त मौसम के बाद बसंत पंचमी से ही प्रकृति की छटा देखते ही बनती है। वहीं, हिंदू मान्‍यताओं के अनुसार इस दिन देवी सरस्‍वती का जन्‍म हुआ था। इस दिन पवित्र नदियों में स्‍नान का व‍िशेष महत्‍व है। पवित्र नदियों के तट और तीर्थ स्‍थानों पर बसंत मेला भी लगता है।

माघी पूर्णिमाः 19 फरवरी को छठां शाही स्नान माघी पूर्णिमा को होगा।माघ पूर्णिमा पर किए गए दान-धर्म और स्नान का विशेष महत्व होता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि माघी पूर्णिमा पर खुद भगवान विष्णु गंगा जल में निवास करते हैं। माघ मास स्वयं भगवान विष्णु का स्वरूप बताया गया है। पूरे महीने स्नान-दान नहीं करने की स्थिति में केवल माघी पूर्णिमा के दिन तीर्थ में स्नान किया जाए तो संपूर्ण माघ मास के स्नान का पूर्ण फल मिलता है।

माघी एकादशीः 16 फरवरी को सातवां शाही स्नान माघी एकादशी को होगा। इसदिन का पुराणों में बहुत महत्व है। इस दिन दान देना कई पापों को क्षम्य बना देता है।

महाशिवरात्रिः कुंभ मेले का आखिरी शाही स्नान 4 मार्च को महा शिवरात्रि के दिन होगा। इस दिन सभी कल्पवासियों अंतिम स्नान कर अपने घरों को लौट जाते हैं। भगवान शिव और माता पार्वती के इस पावन पर्व पर कुंभ में आए सभी भक्त संगम में डुबकी जरूर लगाते हैं। मान्यता है कि इस पर्व का देवलोक में भी इंतज़ार रहता है।

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