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सैनिटेशन के Tender में घोटाले की बू, Turnover और एक्सपीरियंस की शर्तों से संशय

सैनिटेशन के Tender में घोटाले की बू, Turnover और एक्सपीरियंस की शर्तों से संशय

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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा इस वर्ष जारी सैनिटेशन टेंडर में घोटाले की बू आ रही है। सा प्रतीत हो रहा है कि यह सैनिटेशन टेंडर कुछ बड़े ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बाद जारी किए गए हैं। ऐसा इन टेंडर में वार्षिक टर्नओवर और एक्सपीरियंस की शर्तों को देखकर लग रहा है। यह आरोप सैनिटेशन कार्यों के ठेकेदार विजय कुमार और संजीव कुमार ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान लगाए हैं। इनका कहना है कि वर्ष 2012-13 में जो सैनिटेशन टेंडर कॉल किए गए थे उनमें 50 बेड के अस्पताल की सैनिटेशन के लिए आवेदनकर्ता फर्म की वार्षिक टर्नओवर 3 लाख रुपए निर्धारित की गई थी। इसी तरह 51 से 100 बेड के अस्पताल के लिए वार्षिक टर्नओवर 12 लाख, 101 से 150 बेड के अस्पताल के लिए 15 लाख और 151 बेड से ऊपर वाले अस्पताल में सैनिटेशन के लिए आवेदनकर्ता की वार्षिक टर्नओवर 18 लाख रुपए निर्धारित की गई थी।


  • वार्षिक टर्नओवर की राशि कई गुना बढ़ाई, एक्सपीरियंस की शर्तें भी नहीं तर्कसंगत
  • छोटे ठेकेदारों को कॉम्पिटिशन से किया बाहर, प्रदेश सरकार को भी लग रही चपत

इसके अलावा सैनिटेशन में एक वर्ष का संतोषजनक एक्सपीरियंस मांगा गया था। विजय और संजीव का कहना है कि वर्ष 2015-16 में जो सैनिटेशन टेंडर कॉल किए गए थे उनमें 50 बेड के अस्पताल की सैनिटेशन के लिए आवेदनकर्ता फर्म की वार्षिक टर्नओवर बढ़कर 5 लाख रुपए निर्धारित की गई। इसी तरह 51 से 100 बेड के अस्पताल के लिए वार्षिक टर्नओवर 15 लाख, 101 से 150 बेड के अस्पताल के लिए 20 लाख और 151 बेड से ऊपर वाले अस्पताल में सैनिटेशन के लिए आवेदनकर्ता की वार्षिक टर्नओवर 30 लाख रुपए निर्धारित की गई। इसके अलावा सैनिटेशन में एक की बजाय तीन वर्ष संतोषजनक कार्य करने का एक्सपीरियंस मांगा गया था। इनका कहना है कि वर्ष 2017-18 के लिए जो टेंडर जारी किए हैं उनमें वार्षिक टर्नओवर और एक्सपीरियंस की शर्तें हैरान करने वाली हैं। इनमें 50 बेड के अस्पताल की सैनिटेशन के लिए आवेदनकर्ता फर्म की वार्षिक टर्नओवर 5 लाख रुपए से बढ़ाकर सीधे 25 लाख रुपए निर्धारित की गयी है। इसी तरह 51 से 100 बेड के अस्पताल के लिए वार्षिक टर्नओवर 15 लाख से बढ़ाकर 50 लाख, 101 से 250 बेड के अस्पताल के लिए 75 लाख और 251 बेड से ऊपर वाले अस्पताल में सैनिटेशन के लिए आवेदनकर्ता की वार्षिक टर्नओवर एक करोड़ रुपए निर्धारित की गई है। इसके अलावा सैनिटेशन में सरकारी या निजी अस्पतालों में 2 वर्ष का संतोषजनक एक्सपीरियंस मांगा गया है। यह भी शर्त रखी गई है कि 100 बेड के अस्पताल की सैनिटेशन का टेंडर भरने वाली फर्म के पास 50 बेड वाले निजी अस्पताल की संतोषजनक सैनिटेशन का तजुर्बा होना चाहिए। 200 बेड के सरकारी अस्पताल की सैनिटेशन को आवेदनकर्ता फर्म के पास 100 बेड वाले निजी अस्पताल की सैनिटेशन का एक्सपीरियंस होना चाहिए। इन ठेकेदारों ने सवाल उठाया है कि प्रदेश में न तो अस्पतालों की संख्या बढ़ी है और न ही अस्पतालों का ज्यादा विस्तार हुआ है। ऐसे में वार्षिक टर्नओवर की शर्त किस लिहाज से इतनी ज्यादा बढ़ी हुई राशि के साथ रखी गई है। 50 और 100 बेड वाले निजी अस्पतालों का एक्सपीरियंस मांगा गया है लेकिन स्वास्थ्य विभाग यह भी बताए कि इतने बेड वाले कितने निजी स्वास्थ्य संस्थान प्रदेशभर में हैं। 


इन दोनों ने आरोप लगाया है कि पूरे प्रदेश में केवल आधा दर्जन फर्म्स हैं जिनके पास प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों की सैनिटेशन का जिम्मा पिछले कई वर्षों से है। पहले टेंडर में कॉम्पिटिशन होता था और अब नई शर्तों से यही फर्म्स टेंडर प्रक्रिया में भाग लेंगी। ऐसे में छोटे ठेकेदारों को इस कॉम्पिटिशन से पूरी तरह से ही बाहर कर दिया गया है। यह चंद फर्म्स आपस में मिलकर टेंडर भरेंगी और टेंडर हासिल भी करेंगी। इससे सरकार को भी राजस्व के रूप में मोटी चपत लगने वाली है क्योंकि अब कॉम्पिटिशन नहीं होगा। इनकी मांग है कि सैनिटेशन टेंडर की इन शर्तों को लागू करने की जांच की जाए कि कोई मिलीभगत तो नहीं है।

वहीं इनका कहना है कि जल्द ही इस बारे में प्रदेश के सीएम, नेता विपक्ष प्रेम कुमार धूमल और प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव को भी एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस दौरान इन ठेकेदारों के साथ बीजेपी कार्यकारिणी सदस्य अतुल भरद्वाज भी मौजूद रहे। भारद्वाज का कहना है कि इस बारे में जांच होनी चाहिए और आरटीआई के माध्यम से पिछले 10 वर्ष से प्रदेश में सक्रिय चन्द फर्म्स की कार्यप्रणाली और टर्नओवर की जानकारी भी जुटाई जाएगी।

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