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भक्त के लिए भोले नाथ ने जोत दी 40 एकड़ भूमि

भक्त के लिए भोले नाथ ने जोत दी 40 एकड़ भूमि

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भगवान से उसके भक्त का रिश्ता अटूट होता है। यह रिश्ता विश्वास की डोर सं बंधा होता है। भक्त को विश्वास होता है कि जब भी किसी संकट में होगा तो भगवान जरूर उसकी सहायता करेंगे। कहते हैं अगर सच्चे मन से भक्त अपने ईष्ट से कुछ मांगें तो वह अपे भक्त को निराश नहीं करते। भक्त और भगवान के अनूठे रिश्तों की बहुत सारी कहानियां हम वर्षों से सुनते आ रहे हैं। हम आप को भगवान शिव और उनके भक्त की कहानी बताते हैं …
Thirupungur Sivalokanathar Temple Tamil Naduतमिलनाडु में एक बंधुआ मजदूर था। वैसे तो उसका कोई नाम नहीं था। उसे बस सभी हलवाहे के नाम से जानते थे। वह शिव का भक्त था और जमींदार के पास काम करता था। जहां वह रहता था, वहां से सिर्फ पच्चीस किलोमीटर दूर तिरुपुंगुर का प्रसिद्ध शिव मंदिर था। ह हमेशा से इस मंदिर में जाना चाहता था। उसने कई बार जमींदार से मंदिर जाने की इजाजत मांगी, लेकिन जमींदार उसे रोज कुछ खेतों का कुछ न कुछ काम करने को कह देता। हलवाहा बेचारा मन मसोस कर रह जाता। एक दिन उसने ठान ली कि वह मंदिर जरूर जाएगा। इसके लिए वह एक बार फिर जमींदार के पास इजाजत लेने गया। मजदूर की बात सुन जमींदार तैश में आ गया तुम वहां नहीं जा सकते तुम पहले ही बहुत दिन काम से छुट्टी कर चुके हो। हलवाहे ने जाने की ठान रखी थी तो और बोला सिर्फ एक दिन की इजाजत चाहिए मैं एक दिन में ही वापस आ जाऊंगा।


इजाजत देने से पहले आखिरकार जमींदार ने हलवाहे के समक्ष एक शर्त रखी कि तुम जाना चाहते हो तो जाओ पर जाने से पहले 40 एकड़ जमीन जोतनी होगी। सुबह से पहले अगर जमीन की जुताई हो गई तो मंदिर जा सकते हो। हलवाहे ने जाने की ठान रखी थी इसलिए वह चुपचार सोने चला गया। सुबह जब वह उठा तो गांव में हंगामा मचा हुआ था। वह यह देखकर हैरान रह गया कि सारी चालीस एकड़ जमीन की जुताई हो चुकी थी। जमीन को देख जमींदार स्तब्ध था। ये नजारा देख जमींदार के बीवी-बच्चे आकर हलवाहे के पैरों पर गिर पड़े। आसपास के लोगों उसके हाथों में चांदी के सिक्के रख दिए, किसी ने भोजन का थैला रख दिया। किसी ने उसे छड़ी पकड़ा दी।

लोगों का कहना था कि भगवान शिव ने उसे खुद चुना है, अपने भक्त के लिए भगवान ने खुद जमीन जोत दी। आखिरकार हलवाहे की इच्छा पूरी हुई और वह मंदिर पहुंचा। वह जानता था कि छुआछूत के चलते पुजारी उसे मंदिर की देहरी पार नहीं करने देंगे। वह मंदिर के बाहर खड़ा रहा। वह सिर्फ एक बार शिव के दर्शन करना चाहता था तभी एक चमत्कार हुआ मंदिर के द्वार के समक्ष बनी नंदी की मूर्ति एक ओर खिसक गई औऱ भक्त ने अपने भगवान के दर्शन कर लिए। आज भी तिरुपुंगुर में नंदी की मूर्ति एक ओर को है।

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