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राजस्थान के इस समुदाय ने नहीं मनाया रक्षाबंधन का त्यौहार, जानिए क्यों

राजस्थान के इस समुदाय ने नहीं मनाया रक्षाबंधन का त्यौहार, जानिए क्यों

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जैसलमेर।भारत के हर हिस्से में जब रविवार को रक्षाबंधन का त्यौहार मन रहा था, वहीं राजस्थान के पालीवाल समाज ने 700 साल की परंपरा का निर्वाह करते हुए इस त्यौहार से खुद को दूर रखा। पालीवाल समाज रक्षाबंधन का त्यौहार बलिदान दिवस के रूप में मनाती है।

इसके पीछे है यह कहानी

लगभग 725 साल पहले 1291-92 में दिल्ली के तत्कालीन मुगल शासक फिरोह शाह द्वितीय द्वारा अपनी सेना के साथ पाली क्षेत्र में निवास कर रहे इन पालीवाल ब्राहमणों को लूटपाट के उद्देश्य से उन पर जबरदस्त हमला करते हुए उनका नरसंहार किया। इस घटना में कई लोग मारे गए थे और आक्रमणकारियों ने लूट खसोट की थी। यह नरसंहार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन हुआ था। पालीवाल समाज इसी दिन शहीदों को दीप दान कर श्रद्धांजलि देता है।


पालीवाल ब्राहमण आदि गौड़ ब्राहमण के रुप में जाने जाते थे। बाद में पाली में निवास करने के बाद इनकी पहचान पालीवाल ब्राहमण के रुप में होने लगी, लेकिन इन सबके बीच पूरे देश में फैले लाखों पालीवाल ब्राहमण रक्षा बंधन का त्यौहार नहीं मनाते। इस दिन वे अपने पूर्वजों को याद करते है और उनका तर्पण करते हैं।

 

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