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राम नवमी : इस बार नौ साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

राम नवमी : इस बार नौ साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी (Ram Navami) के रूप में मनाया जाता है यानी आज राम नवमी का पावन दिन है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस दिन भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। इस दिन भगवान राम और सीता के साथ मां दुर्गा और भगवान हनुमान की पूजा भी होती है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान राम (Lord Ram) की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में यश व सम्मान की प्राप्ति होती है। रामनवमी के दिन ही नौवीं देवी मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ चैत्र नवरात्र का समापन भी होता है इसलिए आज का दिन भक्तों के लिए बहुत खास है।


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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस वर्ष रामनवमी के अवसर पर इस बार पांच ग्रहों का शुभ संयोग बन रहा है। इससे पहले ऐसा संयोग 2013 में बना था। इस हिसाब से यह दुर्लभ संयोग पूरे नौ साल बाद बन रहा है। राम नवमी के दिन चंद्रमा पूरे दिन और रात स्वयं की राशि कर्क में संचार करेगा, सप्तम भाव में सप्तम भाव में स्वग्रही शनि, दशम भाव में सूर्य, बुध और शुक्र है। तो वहीं इस दिन बुधवार रहेगा। ग्रहों की इस स्थिति के कारण इस बार की रामनवमी बेहद शुभ रहेगी। इस दिन पूजा पाठ और खरीददारी करना बेहद शुभ फलदायी रहेगा।

 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान राम का जन्म कर्क लग्न और कर्क राशि में ही हुआ था। इस बार रामनवमी पर लग्न में स्वग्रही चंद्रमा का होना सुख शांति प्रदान करेगा। प्रातः पुष्य नक्षत्र और इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र होने से इस दिन की शुभता और भी बढ़ जाएगी।

ये रहेंगे शुभ मुहूर्त –

नवमी तिथि आरंभ– 20 अप्रैल 2021 की मध्य रात्रि को 12 बजकर 43 मिनट से

राम नवमी पूजा मुहूर्त– 21 अप्रैल 2021 बुधवार को सुबह 11 बजकर 02 मिनट से दोपहर 13 बजकर 38 मिनट तक

नवमी तिथि समापन– 22 अप्रैल 2021 की मध्य रात्रि 12 बजकर 35 मिनट तक।

राम नवमी पूजा विधि –

राम नवमी के दिन सुबह जल्दी उठें।
स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान की अच्छे से सफाई कर लें।
अब हाथ में अक्षत लेकर व्रत रखने का संकल्प लें।
इसके बाद भगवान राम का पूजन आरंभ करें।
रोली, चंदन, धूप और गंध आदि से षोडशोपचार पूजन करें।
इसके बाद पूजन में गंगाजल, फूल, 5 प्रकार के फल, मिष्ठान आदि का प्रयोग करें।
भगवान राम को तुलसी का पत्ता और कमल का फूल जरूर अर्पित करें।
पूजन करने के बाद अपनी इच्छा अनुसार रामचरितमानस, रामायण या रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें।
भगवान राम की आरती के साथ पूजा संपन्न करें।

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