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इस बार करवा चौथ पर सर्वार्थ सिद्धि योग, व्रत और पूजा रहेगी खास

इस बार करवा चौथ पर सर्वार्थ सिद्धि योग, व्रत और पूजा रहेगी खास

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महिलाओं के लिए करवा चौथ महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। सरगी से लेकर पूजा के लिए तैयार होने और शाम को चांद देखने तक की प्रक्रिया इतनी रोचक होती है कि जो लोग इस व्रत को नहीं करते हैं, वह इसे देखकर ही आनंदित हो जाते हैं।

पं दयानन्द शास्त्री के अनुसार इस वर्ष करवा चौथ के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जिसके चलते व्रत और पूजन बहुत विशेष है। इस बार 70 साल बाद करवाचौथ पर ऐसा योग बन रहा है। इस बार रोहिणी नक्षत्र और मंगल का योग एक साथ आ रहा है। ज्योतिष के मुताबिक यह योग करवाचौथ को और अधिक मंगलकारी बना रहा है। इससे पूजन का फल हजारों गुना अधिक होगा। करवाचौथ पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग होना अपने आप में एक अद्भुत योग है।


27 को 8 बजे के बाद पूजन कल्याणकारी

करवा चौथ के दिन 27 अक्टूबर को रात 7:38 बजे चंद्रोदय होगा लेकिन भद्रा 7:58 बजे तक रहेगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रात नौ बजे तक रहेगा। ऐसे में रात आठ से नौ बजे के बीच पूजन करना सबसे कल्याणकारी होगा।

चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र का होगा

  • पति के लिए व्रत रखने वाली सुहागिनों के लिए यह बेहद फलदायी होगा। ऐसा योग भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा के मिलन के समय भी बना था।
  • इस बार चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र का होगा। इस वजह से विशेष संयोग बन रहा है। इससे व्रत करने वाली महिलाओं को विशेष फल मिलेगा। चंद्रमा की वृष गत होने के कारण कन्या, मिथुन, मकर, कुंभ, वृष और तुला राशि की महिलाओं को अपने पति से विशेष सुख प्राप्त होगा। उनका कहना है क‍ि इस वर्ष 2018 में करवा चौथ के समय शुक्र अस्त रहेगा। इस दौरान शुभ काम नहीं किए जाते हैं, इसलिए महिलाएं करवा चौथ व्रत का उद्यापन नहीं कर पाएंगी।
  • माना जाता है इस मुहूर्त में किया गया हर कार्य सफल होता है और इस दौरान की गई पूजा, व्रत का लाभ ज्यादा मिलता है। करवा चौथ का पूजन भारतीय महिलाएं सौभाग्य की वृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए करती हैं। इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजन और व्रत का समापन किया जाता है।
  • इक्कीसवीं सदी में बिखरते पारिवारिक रिश्ते, आहत होती भावनाएं और पति/पत्नी के मध्य घटते विश्वास को मजबूती प्रदान करनेवाला पर्व ‘गणेश चतुर्थी’ ‘करवा चौथ’ का व्रत 27 अक्तूबर को मनाया जाएगा। द्वापर युग से लेकर आज कलियुग के पांच हजार एक सौ उन्नीस वर्ष व्यतीत होने पर भी यह पर्व उतनी ही आस्था के साथ मनाया जाता है जैसा द्वापर युग में मनाया जाता था।

सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा करने से मिलता है विशेष लाभ

करवा चौथ पर सुहागिन महिलाओं द्वारा दिनभर निर्जला व्रत रखकर शाम के समय प्रदोष काल (गोधुली बेला) में एवं निशीथ काल (मध्य रात्रि) के मध्य भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कुमार कार्तिकेय आदि देवताओं की षोडशोपचार विधि सेपूजन करने के साथ-साथ सुहाग के वस्तुओं की भी पूजा की जाती है।

चंद्रमा का पूजन, दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही भोजन ग्रहण किया जाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजन करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होगी। इसलिए इसी अवधि में पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देना अति उत्तम होगा।

करवाचौथ के दिन पत्नी का करवाचौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं द्वारा मिलकर व्रत की कथा सुनते समय चीनी अथवा मिट्टी के करवे का आदान-प्रदान किया जाता है। घर की बुजुर्ग महिला से आशीर्वाद लिया जाता है।

पं दयानन्द शास्त्री, उज्जैन, मध्यप्रदेश

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