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Himachal के बर्फानी तेंदुए, सांप सहित इन वन्य जीवों के अस्तित्व पर खतरा- जानने को पढ़ें खबर

एक शोध के अनुसार कुछ वर्षों में विलुप्त हो जाएंगे दस लाख वन्य जीव

Himachal के बर्फानी तेंदुए, सांप सहित इन वन्य जीवों के अस्तित्व पर खतरा- जानने को पढ़ें खबर

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शिमला। संयुक्त राष्ट्र 150 सदस्यों के शोध के अनुसार अगले कुछ वर्ष में लगभग दस लाख वन्य जीव (Wildlife) विलुप्त हो जाएंगे और इसका एक मुख्य कारण अवैध शिकार (Illegal Hunting) है, जो जीवों के लिए बहुत बड़ा खतरा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अवैध शिकार तथा लकड़ी की अवैध तस्करी का व्यापार लगभग चालीस अरब का है। भारत फ्लोरा और फौना में समृद्ध देश है और यहां से बहुत सारे जीवों का दक्षिण पूर्व एशिया तथा चीन के लिए अवैध व्यापार होता है। इनमें से प्रमुख प्रजातियां शेर, तिब्बतन एंटीलोप (चीरू), पैंगोलिन, सांप (Snake), कछुए तथा तितलियां हैं। इस श्रेणी में हिमाचल से बर्फानी तेंदुआ (Snow Leopard) , तेंदुआ, सांप व पैंगोलिन आदि रिपोर्ट किए गए हैं। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो इन जीवों का अवैध व्यापार रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह बात अतिरिक्त निदेशक, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यू सीसीबी) आईपीएस तिलोत्तमा वर्मा ने वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर वेबिनार (Webinar) के माध्यम से कही। उन्होंने कहा कि तस्कर अति आधुनिक तरीकों और हाथियारों का प्रयोग कर रहे हैं और इससे निपटने के लिए विभिन्न विभागों को मिलकर काम करना होगा।


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एचपी एनविस हब हिमाचल विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद (हिम्कोस्ट) ने कोविड -19 (Covid-19) महामारी को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन माध्यम से “वन्यजीव सप्ताह” मनाया। कार्यक्रम का आयोजन वेबिनार के माध्यम से किया गया था। वेबिनार का आयोजन “वाइल्ड लाइफ एंड इट्स कंजर्वेशन” थीम पर किया गया। वेबिनार में 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया। समन्वयक, एनविस डॉ. अपर्णा ने वेबिनार की मेजबानी की और इस सप्ताह महत्त्व पर प्रकाश डाला। वेबिनार के लिए प्रख्यात वक्ता अतिरिक्त निदेशक, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यू सीसीबी) आईपीएस तिलोत्तमा वर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF) हिमाचल आईएफएस डॉ. सविता और निदेशक आईजीसीएमसी विश्व वन्यजीव कोष (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) डॉ. जीअरेंद्रेंनन थे। डॉ. सविता ने कहा कि हिमाचल वन विभाग ने बंदरों की समस्या से प्रदेश वासियों को राहत दिलाने के लिए बहुत से कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गंगा के जीर्णोंद्धार के लिए उठाए गए कदम काफी कारगर रहे हैं और अब यह देश की 9 अन्य नदियों के लिए भी उठाए जाएंगे।

 

 

डॉ. जीअरेंद्रेंनन ने वन्यजीवों की ट्रैकिंग में इस्तेमाल की जाने वाली विभिन तकनीकों जैसे रेडियो, जीपीएस, सैटलाइट, कैमरा, राडार, ड्रोन, श्रवण, वीएचएफ ट्रैकिंग, कंजर्वेशन जेनेटिक्स, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, आईओटी (IOT) के बारे मे विस्तार से जानकारी दी। लगभग 2 घंटे तक चले इस वेबिनार में विद्यार्थिओं, शोधकर्ताओं और वन विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया तथा इसकी बहुत सराहना की। बता दें कि वन्य जीव सप्ताह 2-8 अक्टूबर तक भारत में हर साल मनाया जाता है। वन्यजीव सप्ताह का उद्देश्य लोगों को वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। इसके अलावा, भारत सरकार ने वन्यजीवों की एक भारतीय बोर्ड की स्थापना की, जो वन्यजीवों के संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए काम करता है। वन्यजीव हमारे पर्यावरण को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वन्यजीव हमारी प्रकृति की विभिन्न प्राकृतिक प्रक्रियाओं में संतुलन बनाते हैं।

 

 

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