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बढ़ गया है कर्ज का बोझ, मुक्ति दिलाएगा “ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र”

बढ़ गया है कर्ज का बोझ, मुक्ति दिलाएगा “ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र”

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ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र भगवान श्री गणेश को समर्पित हैं। ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र का पाठ जब किसी जातक पर ऋण अर्थात कर्ज (Loan) की स्थिति बहुत अधिक बढ़ जाये या बढ़ गया हो उनके लिए बहुत लाभकारी है। ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र का जो भी व्यक्ति नियमित रूप से पाठ करता है उसको जीवन में कर्ज से परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है और जिसका कर्ज उतर नहीं रहा हो उसके लिए भी ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र ज्यादा लाभकारी है।



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ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र विधि –

जब किसी भी जातक के कर्ज बहुत ज्यादा हो गया हो और उतरने का नाम नहीं ले रहा हो तो वे जातक किसी शुभ तिथि के दिन शुभ मुहूर्त चौकी पर केसरिया अथवा लाल वस्त्र बिछाकर उस पर भगवान श्री गणेश जी को स्थापित करें, जैसे भगवान श्री हनुमान जी को सिंदूर व चमेली के तेल का चोला अर्पित करते है ठीक उसी तरह से सिंदूर व चमेली के तेल का चोला श्री गणपति को अर्पित कर अपने बाये हाथ की तरफ देसी घी का दीपक व दाहिने हाथ की तरफ सरसों के तेल या तिल के तेल का दीपक स्थापित करके जलाकर ऋण हारता गणेश स्त्रोत का नियमित अपनी श्रद्धा अनुसार 3, 5, 8, 9 , अथवा 11 पाठ 45 दिन या छ: मास नित्य करें। ऋण मोचन गणेश स्त्रोत का पाठ करने के बाद भगवान श्री गणेश जी को गुड़, चने व बेसन का कुछ भोग लगाये।

ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र –

।। ध्यान ।।

ॐ सिन्दूर-वर्णं द्वि-भुजं गणेशं लम्बोदरं पद्म-दले निविष्टम्।
ब्रह्मादि-देवैः परि-सेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणामि देवम्।।

।। मूल-पाठ ।।

सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजितः फल-सिद्धये।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।१

त्रिपुरस्य वधात् पूर्वं शम्भुना सम्यगर्चितः।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।२
हिरण्य-कश्यप्वादीनां वधार्थे विष्णुनार्चितः।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।३
महिषस्य वधे देव्या गण-नाथः प्रपुजितः।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।४
तारकस्य वधात् पूर्वं कुमारेण प्रपूजितः।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।५
भास्करेण गणेशो हि पूजितश्छवि-सिद्धये।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।६
शशिना कान्ति-वृद्धयर्थं पूजितो गण-नायकः।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।७
पालनाय च तपसां विश्वामित्रेण पूजितः।
सदैव पार्वती-पुत्रः ऋण-नाशं करोतु मे।।८
इदं त्वृण-हर-स्तोत्रं तीव्र-दारिद्र्य-नाशनं,
एक-वारं पठेन्नित्यं वर्षमेकं सामहितः।
दारिद्र्यं दारुणं त्यक्त्वा कुबेर-समतां व्रजेत्।।

पंडित दयानंद शास्त्री, उज्जैन (म.प्र.) (ज्योतिष-वास्तु सलाहगाड़ी) 09669290067, 09039390067

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