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पेट के भारीपन से परेशान हैं तो न करें नजर अंदाज, अपनाएं ये टिप्स

जो भी आप खाएं आराम से खाएं और सही तरीक़े से चबाएं

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आम तौर पर हमारे आसपास बहुत सारे लोग पेट के भारीपन यानी पेट फूलने जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं। थोड़ा सा कुछ खाया नहीं कि पेट में भारीपन आ जाता है। पेट के भारीपन का सबसे आम कारण बदहज़मी है, इस समस्या की शुरुआत भोजन को निगलने से होती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम भोजन को आराम से जबाने के बजाय उसे फटाफट निगलते हैं। इस समस्या का सबसे से आसान उपाय यह है कि जो भी आप खाएं आराम से खाएं और सही तरीक़े से चबाएं। इसके अलावा अप अगर इन अहम बातों की तरफ ध्यान देंगे तो काफी हद तक समस्या पर काबू पा सकते हैं …

अगर आप भूख न होने पर भी बार-बार खाते हैं तो एसिड रीफ़्लक्स (उतार-चढ़ाव) की संभावनाएं रहती हैं, यह वह स्थिति है जहां भोजन, पेट के एसिड्स और दूसरे पाचन संबंधी रस इसोफ़ैगस यानी भोजन नलिका में बहने लगते हैं। जब एसिड रीफ़्लक्स मांसपेशियां, जो भोजन के पेट में प्रवेश करते समय खुलती हैं और फिर एसिड को पीछे की तरफ़ आने से रोकने के लिए बंद होती हैं, ठीक तरह से काम नहीं करतीं। अपनी ख़ुराक पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें और प्रति मील केवल एक प्रोटीन खाएं। आयुर्वेद के अनुसार दो भोजनों के बीच कम से कम पांच घंटे का अंतराल होना चाहिए, जिससे शरीर को पाचन के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

कृत्रिम मिठास से बचें। कृत्रिम मीठे में जो आम सामग्री होती है, वह है सॉर्बिटॉल, जो बेहद धीमी गति से मेटाबलाइज़ होता है। शक्कर के बजाय चाय में एक चम्मच गुड़ मिलाएं तो बेहतर होगा।

पैकेट वाले भोजन में जो प्रिज़र्वेटिव्स, रंग और ऐडिटिव्स शामिल होते हैं, वो पाचन में सहायक आंत के अच्छे बैक्टीरिया को ठीक तरह से काम नहीं करने देते। इससे पेट का भारीपन और बदहज़मी जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। भोजन को उसके नैसर्गिक रूप में ही खाएं और प्लास्टिक में लिपटे, ललचानेवाले भोजन से दूर ही रहें।

कोला और अन्य कार्बनेटेड ड्रिंक्स शरीर में गैस भरते हैं। कार्बनेटेड ड्रिंक्स के बजाय ताज़ा निचोड़े गए फलों के रस, नारियल पानी, छाछ या जलजीरा का एक बड़ा ग्लास खाने के साथ पीएं।
जब आप कब्ज़ से पीड़ित होते हैं तो निचली आंत में अपशिष्ट इकट्ठा होने लगता है, जिससे आंत में ज़्यादा गैस रिलीज़ होती है। एक्सरसाइज़ या किसी भी प्रकार की गतिविधि मांसपेशियों को शिथिल कर समस्या को कम करती है।

पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने से पेट के भारीपन की समस्या हो सकती है. पानी की कमी महसूस कर शरीर पानी इकट्ठा करने लगता है। पानी के अणु सोडियम के साथ मिल जाते हैं और शरीर के अंदर रह जाते हैं। नमक का सेवन कम करें और शरीर में नमी का स्तर बनाए रखें, ताकि आपका शरीर पानी के साथ टॉक्सिन्स को भी बाहर निकाल सके।

चाय, कॉफ़ी और कैफ़ीन वाले अन्य ड्रिंक्स मूत्रवर्धक होते हैं और आपके सिस्टम से पानी को निथार कर बहा देते हैं। ये संवेदनशील बाउल सिंड्रोम की समस्या पैदा कर सकते हैं, जो पेट में दर्द, मरोड़, अचानक व तुरंत पेशाब जाने की ज़रूरत से पहचाना जा सकता है। ये सभी पेट के भारीपन का कारण बन सकते हैं।

यदि सभी प्रकार के प्रयासों के बावजूद आप पेट में भारीपन महसूस करती हैं तो इसके पीछे लैक्टोज़ के प्रति असहनशीलता, ग्लूटन के प्रति संवेदनशीलता या अन्य फ़ूड एलर्जी कारण हो सकते है। बेहतर होगा कि किसी विशेषज्ञ की राय लें

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