स्कॉलरशिप घोटालाः हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट में सीबीआई की दबिश, मांगा 2014 से अब तक का पूरा ब्यौरा

जांच एजेंसी की खबर मिलते ही उच्च शिक्षा विभाग में भी हड़कंप

स्कॉलरशिप घोटालाः हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट में सीबीआई की दबिश, मांगा 2014 से अब तक का पूरा ब्यौरा

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शिमला। 250 करोड़ की स्कॉलरशिप घोटाले (Scholarship scam) में सीबीआई (CBI) ने अब उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education Department) में दबिश दे दी है। सीबीआई (CBI) सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बुधवार को सीबीआई (CBI) के जांच अधिकारी शिक्षा विभाग की स्कॉलरशिप ब्रांच पहुंची। केंद्रीय जांच एजेंसी ने उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education Department) से चार साल के दौरान स्कॉलरशिप (Scholarship) का पूरा ब्यौरा मांगा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सीबीआई (CBI) के एक जांच अधिकारी ने अचानक शिक्षा विभाग में दबिश दी। यहां स्कॉलरशिप (Scholarship) ब्रांच में कार्यरत अधिरी एवं कर्मचारियों के भी बयान दर्ज किए गए। उसके बाद स्कॉलरशिप ब्रांच को वर्ष 2014 से 2018 तक कुल कितने छात्रों को स्कॉलरशिप जारी की और किन-किन संस्थानों को दी गई। सीबीआई ने आगामी दो दिनों में पूरा ब्यौरा संपूर्ण दस्तावेज सहित सौंपने की हिदायत दी है।


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ऐसे में शिक्षा विभाग की स्कॉलरशिप (Scholarship) ब्रांच में कार्यरत कर्मचारियों की भी दिक्कतें बढ़ गई हैं। प्रारंभिक जांच के दौरान जो जानकारी दी गई थी सीबीआई उन्हीं पहलुओं को आधार बना कर पूरा रिकॉर्ड खंगाल रही है। 80 फीसदी छात्रवृत्ति (Scholarship) का बजट सिर्फ निजी संस्थानों में बांटा गया। जबकि सरकारी संस्थानों को छात्रवृत्ति के बजट का मात्र 20 फीसदी हिस्सा मिला। बीते चार साल में 2.38 लाख विद्यार्थियों में से 19 हजार 915 को चार मोबाइल फोन नंबर से जुड़े बैंक खातों में छात्रवृत्ति (Scholarship) राशि जारी कर दी गई।

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इसी तरह 360 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति (Scholarship) चार ही बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। 5729 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में तो आधार नंबर का प्रयोग ही नहीं किया गया है। ऐसे में अब सीबीआई कभी भी एफआईआर (FIR) दर्ज कर सकती है। राज्य सरकार को शिकायत मिली थी कि जनजातीय क्षेत्र लाहुल स्पीति में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति राशि नहीं मिल रहीं है। ऐसे में शिकायतों को संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग ने मामले की जांच करवाने का निर्णय लिया। इस दौरान फर्जी एडमिशन से छात्रवृत्ति राशि के नाम पर घोटाले होने के तथ्य सामने आए। घोटाले की राशि 250 करोड़ बताई जा रही है।

 


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