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SFI ने #HPU में किया प्रदर्शन, मांगें ना मानने पर उग्र आंदोलन को चेताया

छात्रों के स्कॉलरशिप जारी करने सहित विभिन्न मांगें रखीं

SFI ने #HPU में किया प्रदर्शन, मांगें ना मानने पर उग्र आंदोलन को चेताया

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शिमला। एसएफआई (SFI) शिमला जिला के आह्वान पर शिमला शहरी इकाई ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (#HPU) के अंदर प्रदर्शन किया। एसएफआई शिमला शहरी इकाई सह सचिव सन्नी सेक्टा ने बताया कि पिछले करीब नौ महीनों से छात्रों को उनकी स्कॉलरशिप (Scholarship) नहीं मिली है, जिससे कहीं ना कहीं छात्रों पर आर्थिक बोझ पड़ा है। उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। इसका सबसे ताजा उदाहरण लेडी श्री राम कॉलेज दिल्ली के अंदर देखने को मिला है, जहां पर स्कॉलरशिप ना मिलने की वजह से बीएससी ऑनर्स की एक छात्रा आत्महत्या कर ली है। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि हमारी सरकार उच्च शिक्षा को लेकर कितनी संवेदनशील है। जेआरएफ (JRF) हो या एसआरएफ की दोनों की स्कॉलरशिप पिछले चार सालों से लंबित पड़ी है। एसएफआई ने मांग उठाई कि जल्द से जल्द छात्रों को उनकी स्कॉलरशिप दी जाए, ताकि सभी छात्र बिना किसी मानसिक तनाव के अपने रिसर्च वर्क पूरी कर सकें।

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एचपीयू में छात्र समुदाय पिछले लंबे समय से प्रवेश परीक्षा आधारित एडमिशन की बात विश्वविद्यालय के अंदर कर रहा है, लेकिन कहीं ना कहीं विश्वविद्यालय इस बार एलएलएम, एमफिल तथा एमएड (M.Ed) के अंदर एंट्रेंस एग्जाम करवाने से अपने हाथ पीछे खींच रहा है। उन्होंने कहा कि एमफिल, एलएलएम और एमएड की प्रवेश परीक्षा करवाई जाए और इसके साथ ही नर्सिंग की छात्राओं को प्रमोट किया जाए, क्योंकि कोविड-19 के चलते उनका सिलेबस पूरा नहीं हो पाया है। जिला सचिव बंटी ठाकुर ने कहा कि केंद्र की सरकार द्वारा शिक्षा का लगातार निजीकरण किया जा रहा है। शिक्षा पर 18% जीएसटी का एसएफआई विरोध करती है, जिसके चलते प्रदेश सरकार द्वारा बीएड (BEd) छात्रों से 18% जीएसटी के साथ फीस वसूली जा रही है, जिसका एसएफआई विरोध करती है। दूसरी तरफ हिमाचल सरकार भी पहले ही जल्दबाजी में यह फैसला ले चुकी है कि अगली बार से हिमाचल के अंदर नई शिक्षा नीति लागू कर दी जाएगी, जिस नई शिक्षा नीति के अंदर एमफिल को खत्म करने की बात की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह उच्च शिक्षा को खत्म करने की साजिश है। एसएफआई ने बीएड तीसरे सेमेस्टर के परीक्षा परिणामों अंदर हुई धांधली की भी जांच करवाने की मांग की, क्योंकि बहुत सारे छात्र मानसिक रूप से परेशान हैं। वजह साफ है उन्हें मात्र एक या दो नंबर पेपरों के अंदर दिए गए हैं तथा उनके लिए पेपर रिचेकिंग की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। मात्र पुनर्मूल्यांकन के नाम पर उनसे लूट हो रही है।

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एसएफआई ने मांग की है कि विश्वविद्यालय के अंदर जितने भी नॉन सब्सिडाइज्ड (Non Subsidized) सीटें हैं उनके अंदर जो फीस 80,000 से 1,20000 तक है, उस फीस में छात्रों को राहत दी जाए। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इन मांगों पर जल्दी से जल्दी गौर नहीं किया जाता है तो आने वाले समय के अंदर एसएफआई उग्र आंदोलन करेगी।

 

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