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टाउन हॉल नगर निगम का, पर्यटन विभाग एवं सरकार न करें भविष्य तय

टाउन हॉल नगर निगम का, पर्यटन विभाग एवं सरकार न करें भविष्य तय

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शिमला। राजधानी स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल को लेकर बुलाई गई बैठक में उस समय गहमागहमी हो गई जब पूर्व मेयर संजय चौहान ने इसे नगर निगम को वापस देने की पैरवी की। सभी पार्षदों ने भी उनसे सहमति जताई जबकि दूसरा पक्ष इसे पुस्तकालय या म्यूजियम बनाने की बात कह रहा था।  टाउन हॉल के जीर्णोद्वार के बाद हाईकोर्ट में इसे पुस्तकालय या म्यूजियम में बदलने के लिए याचिका दायर की गई है। भवन किसको मिले इस संबंध में कोर्ट के आदेशों के बाद शिमला में पर्यटन विभाग ने शनिवार को सभी स्टेक होल्डर बुलाए थे। उधर नगर निगम के सभी सदस्य भी भवन को नगर निगम को वापस देने पर अड़े थे जबकि कुछ लोग इसे पुस्तकालय या म्यूज़ियम बनाने के पक्ष में भी थे।

इस बैठक के दौरान पूर्व मेयर संजय चौहान ने ज़ोरदार ढंग से कहा कि ये भवन नगर निगम का है और वापस उसी को मिलना चाहिए। पर्यटन विभाग एवं सरकार को ऐसी बैठक कर इसका भविष्य तय करने का अधिकार नहीं है। नगर निगम शिमला सबसे पुरानी निगम है। इसलिए ये मीटिंग असंवैधानिक है। नगर निगम की मेयर को पूरा हक है कि वह आज ही टाउन हॉल में जाएं और वहां कुर्सी पर बैठे। इतना सुनना था कि सभी पूर्व एवं मौजूद वर्तमान पार्षद संजय चौहान के पक्ष में खड़े हो गए और सदन में हंगामा शुरू हो गया।


कोर्ट ने दिए थे आदेश

शिमला का प्रसिद्ध टाउन हॉल का जीर्णोद्धार का कार्य पूरा हो चुका है। लेकिन अब लड़ाई यह है कि हॉल किसको मिलना चाहिए। जीर्णोद्धार का कार्य शुरू होने से पहले ये ऐतिहासिक भवन नगर निगम शिमला के पास था। लेकिन भवन के जीर्णोद्धार के बीच में ही मामला हाईकोर्ट में चल रहा है कि ये भवन किसको मिलना चाहिए। कोर्ट ने आदेश दिए थे कि इस मामले में जनता की राय ली जाए। इस पर शनिवार को यह बैठक हुई। अपने पिछले आदेशों के तहत हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिए थे कि विरासत भवन टाउन हॉल के जीर्णोद्धार के बाद उचित उपयोग बारे अपना शपथ पत्र दायर करें और अदालत की स्वीकृति के बिना टाउन हॉल को नगर निगम को न सौंपा जाए। न्यायालय ने अपने दृष्टिकोण को व्यक्त किया कि शायद यह एक पुस्तकालय और अन्य आम जनता की उपयुक्तताओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

110 साल पुराना है यह भवन

110 साल पुराने इस भवन का निर्माण 1908 में किया गया था और इसका डिजाइन स्कॉटलैंड के आर्किटेक्ट जेम्स रेंजैम द्वारा बनाया गया था। लेकिन रखरखाव न होने और शिमला नगर निगम की अनदेखी के चलते यह भवन जर्जर हो गया था। अब 8 करोड़ 2 लाख के खर्चे से जीर्णोद्वार का कार्य किया गया। टाउनहॉल का भवन जब बना तो इसमें अंग्रेजों के समय से म्यूनिस्पल कमेटी का कार्यालय बना दिया था। उस समय शिमला की कमेटी के हेल्थ आफिसर से लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी इसमें बैठते थे। इनके अलावा शहर के ट्रांसपोटेशन का काम भी यहीं से मानिटर किया जाता था। शिमला नगर निगम के कार्यालय इसमें शुरू कर दिया। इसके जीर्णोद्धार का काम शुरू करने से पहले ही इसे खाली किया गया। तब से नगर निगम शिमला का कार्यालय डीसी आफिस के भवन में चल रहा है।

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