×

मानकोटिया की खामोशी किसी तूफान का संकेत तो नहीं

मानकोटिया की खामोशी किसी तूफान का संकेत तो नहीं

- Advertisement -

धर्मशाला। प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष मेजर विजय सिंह मानकोटिया आजकल बिलकुल खामोश हैं। शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में अपनी ही पार्टी द्वारा दरकिनार किये जाने पर भी मानकोटिया ने अभी तक चुप्पी साधे रखी है और कोई भी प्रतिक्रिया उनकी ओर से नहीं आई है। यह हैरान करने वाली बात तो है लेकिन यह कांग्रेस के लिए गंभीर मसला भी हो सकता है। मेजर मानकोटिया की यह खामोशी किसी तूफान के आने से पहले का संकेत लग रही है। क्योंकि मानकोटिया इससे पहले भी कांग्रेस के लिए शाहपुर के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति में भी तूफान खड़ा कर चुके हैं। मानकोटिया की सीडी ने वर्ष 2007 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के मिशन रिपीट को मिशन डिफीट में बदलने में काफी अहम रोल निभाया था। जानकारी के मुताबिक उस समय भी मानकोटिया खुद को तरजीह न मिलने से आहत थे और कमोबेश वही हालात अब भी बन रहे हैं। ऐसे में मानकोटिया की खामोशी किसी बड़े तूफान की और इशारा जरूर कर रही है। अब देखना यह है कि क्या मानकोटिया के लपेटे में सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र के ही नेता आते हैं या फिर पूरी पार्टी को ही प्रदेश में कटघरे में खड़ा होना पड़ेगा।


  • शाहपुर के साथ साथ प्रदेश की राजनीति में भी ला चुके हैं भूचाल
  • कांग्रेस द्वारा हाशिये पर धकेले जाने पर भी खामोश ही हैं मेजर

सनद रहे कि सीएम वीरभद्र सिंह के शीतकालीन प्रवास के दूसरे चरण में शाहपुर विधानसभा क्षेत्र को कई सौगातें मिलनी थीं जिनमें लंज कॉलेज एक अति महत्वपूर्ण तोहफा था। सीएम के कांगड़ा प्रवास के पहले चरण में ही यह तोहफा जनता को मिला लेकिन यह सब मानकोटिया की गैरमौजूदगी में हुआ। सीएम के शीतकालीन प्रवास के दूसरे चरण में भी शाहपुर को सौगातें मिलीं मगर एक बार फिर से मानकोटिया दरकिनार हुए। जब तक सीएम कांगड़ा प्रवास पर रहे मानकोटिया ने भी दिल्ली में डेरा जमाए रखा। मानकोटिया की गैरमौजूदगी में उनके समर्थकों ने अपने स्तर पर अपना विरोध भी दर्ज करवाया लेकिन वह भी लंबा नहीं चला। अब मानकोटिया वापस आ चुके हैं लेकिन उन्होंने अब तक इस सारे मसले पर खामोशी ही अख्तियार की हुई है।

शाहपुर विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस के लिए लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ है। यहां बीजेपी प्रत्याशी लगातार जीत दर्ज करती आ रही हैं जबकि कांग्रेस अपनों से ही लड़कर हारती आ रही है। आगामी चुनावों में भी यह स्थिति सुधरेगी इसकी उम्मीद कम ही लगती है। 2007 के चुनावों में मानकोटिया ने बसपा का दामन थाम लिया और उनके खास सिपहसलार रहे ओंकार राणा ने शाहपुर से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और कांग्रेस की जीत की उम्मीदों को धूमिल कर दिया। वर्ष 2012 के चुनावों में मानकोटिया की वापसी तो कांग्रेस में हो गई लेकिन तब तक पूर्व में कांग्रेस प्रत्याशी रहे केवल सिंह पठानिया भी अपना जनाधार तैयार कर चुके थे। कांग्रेस साफ तौर पर दो धड़ों में बंट गई थी और इसका खामियाजा भी उसे 2012 के चुनावों में भुगतना पड़ा। अब भी कांग्रेस दो धड़ों में बंटी हुई है और दोनों धड़ों के एकजुट होने की फिलहाल कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही।

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है