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Dharamshala में SAI के Trial : बख्शो भी पहुंची

Dharamshala में SAI के Trial : बख्शो भी पहुंची

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धर्मशाला। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी साई के धर्मशाला स्थित छात्रावास के लिए आज से लड़कियों के ट्रायल शुरू हो गए हैं। तीन दिन तक चलने वाले इन ट्रायल्स में वॉलीबाल, कबड्डी, हॉकी, एथलेटिक्स और टेबल टेनिस के लिए प्रतिभावान खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। इस बार ट्रायल दो वर्गों में हो रहे हैं। पहला वर्ग 10 से 14 वर्ष का है और दूसरा 15 से 17 वर्ष है।


  • दो वर्गों में तीन दिन तक चलेगा ट्रायल
  • 10 से 14 और 15 से 17 आयु वर्ग की लड़कियों के लिए मौका

इससे पहले सिर्फ 12 से 18 वर्ष आयुवर्ग के खिलाड़ियों को ट्रायल के लिए बुलाया जाता था। वहीं,छात्रावास में एंट्री पाने के लिए बख्शो देवी भी धर्मशाला पहुंची हुई है। इस बार बख्शो देवी को समाजसेवी संजय शर्मा और जग्गू नोरिया ट्रायल देने में मदद कर रहे हैं। यह दोनों ही इस प्रतिभावान उभरती हुई खिलाड़ी को ऊना से धर्मशाला लेकर आए हैं और ट्रायल की सारी औपचारिकताएं भी खुद पूरी करने में जुटे हुए हैं।

गत वर्ष अगस्त माह में धर्मशाला में ही कुछ समाजसेवियों ने मिलकर यह निर्णय लिया था कि यदि सरकार बख्शो देवी की मदद नहीं करती है तो वह अपने स्तर पर एक अभियान चलाकर गरीबी की शिकार इस प्रतिभावान खिलाड़ी की मदद करेंगे। अब जबकि सरकार ने बख्शो की कोई सुध नहीं ली तो यह समाजसेवी खुद ही उसे एक मुकाम पर पहुंचाने में जुट गए हैं। गौरतलब है कि बख्शो देवी कुछ समय पहले धर्मशाला में ही सुर्खियों में आई थी। एथलेटिक्स प्रतियोगिता के 5 हजार मीटर रेस के वर्ग में ऊना की यह गोल्ड मेडल विजेता, पेट दर्द के बावजूद मैदान में उतरी थी। लेकिन पेट में पथरी के दर्द के कारण वह राज्यस्तरीय प्रतियोगिता जीत नहीं पाई थी। बख्शो एक ऐसी बेटी है जो सरकारी तंत्र की नाकामी का जीता जागता उदाहरण है। ऊना जिला की इस बेटी के पास घर तो है, लेकिन इस घास से बने घर में दीवारें नाम मात्र हैं।

खिड़कियां ऐसी हैं जो कभी बंद नहीं होतीं क्योंकि वह लकड़ी और मिट्टी की ईंटों के बीच की खाली जगह है जहां कोई दरवाजा नहीं। एक विधवा मां है, जिस पर पूरे परिवार का बोझ है। उस मां के पास बख्शो के इलाज़ के पैसे भी नहीं हैं। बख्शो की काबिलियत देखकर लोगों ने उसे स्पोर्ट्स होस्टल में दाखिला दिलवाने की मांग सरकार से की, लेकिन बीमार बख्शो हॉस्टल का ट्रायल पास नहीं कर पाई। मामला ठंडे बस्ते में चला गया और कुछ दिन पहले समाजसेवी संजय शर्मा उसके घर पहुंचे। बख्शो के घर का मंजर देख वह भी हैरान रह गए। उन्होंने उस समय जो मदद हो सकी वह की लेकिन प्रदेश की इस बेटी के सपनों को वह अपने साथ ले आए। अब अपने साथियों और अन्य समाजसेवी संगठनों के साथ वह बख्शो के सपनों को पूरा करने का प्रयास करने में लगे हुए हैं।

मां और देश का नाम ऊंचा करना है सपना

बख्शो देवी का कहना है कि अपनी मां और देश का नाम ऊंचा करना उसका एकमात्र सपना है। पहले यह सपना साकार होना मुश्किल लग रहा था, लेकिन अब कई हाथ मदद को बढ़े हैं। घर में राशन है, खाना मिल जाता है अब घर की कोई ज्यादा चिंता नहीं है। अब मेरा लक्ष्य सिर्फ ट्रायल में सफल होना है। ट्रायल के लिए मेहनत कर रही हूं। बख्शो का कहना है कि पथरी का दर्द अब भी कभी कभार तंग करता है, जिसकी वह दवाई भी खा रही है।

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