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मंडी कलम में नई जान फूंकने को कवायद शुरू

मंडी कलम में नई जान फूंकने को कवायद शुरू

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मंडी। रियासत काल में चर्चित रही मंडी कलम की कला को आगे बढ़ाने की कवायद शुरू हो गई है। पीढ़ी दर पीढ़ी यह कला आगे पहुंचे इसके लिए बच्चों को इस कला से अवगत करवाया जा रहा है। मंडी शहर के गांधी भवन में इंडियन नेशनल ट्रस्ट फार आर्ट एंड कल्चर हैरिटेज (इंटेक) संस्था की तरफ से मंडी कलम पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

इस कार्यशाला में मंडी शहर के विभिन्न स्कूलों से आए करीब 50 बच्चे भाग ले रहे हैं। मंडी कलम की कला को सहेजने का काम कर रहे चित्रकार राजेश कुमार के मार्गदर्शन में यह कार्यशाला आयोजित की जा रही है। राजेश कुमार अपने सहयोगियों के साथ स्कूली बच्चों को मंडी कलम की बारीकियां सीखाने के साथ-साथ उन्हें इस कला की संपूर्ण जानकारी देने का प्रयास भी कर रहे हैं।


राजेश कुमार ने खेद जताते हुए कहा कि इस कला को शासन और प्रशासन स्तर पर आगे बढ़ाने में कोई सहायता नहीं मिल रही और इसी कारण यह कला विलुप्त होती जा रही है। उन्होंने कहा कि आज लोगों को स्वयं आगे आकर इस कला को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे पहुंचाना होगा तभी इसे सहेजा जा सकता है।

वहीं कार्यशाला में भाग लेने आए बच्चे भी इसमें पूरी तन्मयता से भाग लेते हुए नजर आ रहे हैं। बच्चे मंडी कलम के तहत चित्रकारी भी कर रहे हैं और इस कला की बारीकियों को भी सीख रहे हैं। वहीं इंटेक संस्था के मंडी चैप्टर के संयोजक नरेश मल्होत्रा ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार की कार्यशालाओं के आयोजन का दौर जारी रहेगा ताकि विलुप्त हो चुकी इस कला को फिर से सहेजा जा सके।

बता दें कि मंडी कलम रियासत काल की सबसे चर्चित चित्रकारी थी। उस समय के चित्रकार इस पर बड़ी बारीकी से काम करते थे और उम्दा चित्रों को बनाते थे। उस दौर में मंडी कलम की बाकी रियासतों में भी मिसाल दी जाती थी, क्योंकि इसमें रंगों का इतनी सुंदरता से इस्तेमाल किया जाता था, जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता था। लेकिन, समय के साथ ऐसे चित्रकारों का देहावसान हो गया और यह कला आगे नहीं बढ़ पाई। यही कारण है कि आज यह कला लगभग विलुप्त हो चुकी है और कुछ चित्रकार ऐसे हैं जिन्होंने इसे फिर से सहेजने का बीड़ा उठाया है।

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