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पेड़ कटान मामले में दर्ज हुई एफआईआर

पेड़ कटान मामले में दर्ज हुई एफआईआर

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धर्मशाला। विकास खंड धर्मशाला के तहत सौकणी दा कोट पंचायत में पेड़ कटान के मामले में आखिरकार प्रशासन की तंद्रा टूट गई और हरकत में आते हुए प्रशासन की टीम ने मौके का मुआयना किया। पेड़ किसने और क्यों काटे इसपर अभी संशय बना हुआ है और मामले की छानबीन के लिए प्रशासन ने पुलिस में एफआईआर दर्ज करवा दी है। जिला प्रशासन की टीम ने जांच के दौरान पाया कि जिस जगह से पेड़ कटे हैं वह न तो सरकारी भूमी है और न ही वन विभाग की। वह भूमि अघंजर महादेव मंदिर की है और इसी के चलते प्रशासन ने एफआईआर दर्ज करवाई है।

  • नींद से जागा प्रशासन, मौके पर पहुंची टीम
  • अघंजर महादेव मंदिर की भूमि से कटे हैं दो दर्जन से अधिक पेड़

सनद रहे कि बुधवार को जब यह मामला सामने आया तो जिला प्रशासन, वन विभाग और अन्य अधिकारियों यहां तक कि स्थानीय पंचायत प्रधान ने भी इस बारे में अनभिज्ञता जताई थी। जिस जगह पेड़ काटे गए हैं वह सड़क के साथ ही लगती है। जानकारी के अनुसार उस जगह करीब 26 पेड़ों पर कुल्हाड़ी चली है लेकिन किसी को इस बारे में भनक भी नहीं लगी यह अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। एसडीएम धर्मशाला श्रवण मांटा ने इस बारे में बताया कि कटे पेड़ों की स्थिति जानने के लिए प्रशासन की टीम ने उस जगह का दौरा किया है। जिस भूमि पर से पेड़ कटे हैं वह अघंजर महादेव मंदिर की भूमि है। जिला प्रशासन ने पेड़ कटान मामले में एफआईआर दर्ज करवा दी है।

दो दर्जन पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी, प्रशासन
को भी नहीं जानकारी

विकास खंड धर्मशाला की ग्राम पंचायत सौकणी दा कोट में दो दर्जन से अधिक पेड़ों पर कुल्हाड़ी चली है। लेकिन यह पेड़ किसने काटे और क्यों काटे इस बारे में शायद प्रशासन को भी जानकारी नहीं है। वन विभाग ने भी इस मामले से अनभिज्ञता जताई है लेकिन वहीं सूत्रों के मुताबिक वन विभाग ने मौके पर जाकर काटे गए पेड़ों की रिपोर्ट तैयार की है। जिस भूमि पर से पेड़ काटे गए हैं वह भूमि सुप्रसिद्ध अघंजर महादेव मंदिर के साथ लगती है। यह भूमि अघंजर महादेव मंदिर की ही थी और वर्ष 2005 में अक्षरधाम मंदिर बनाने के लिए इसे ट्रांसफर किया गया था।dharamshala1

  • अघंजर महादेव के साथ लगते जंगल में कटे पेड़
  • अक्षरधाम मंदिर निर्माण के लिए ट्रांसफर की थी जमीन
  • सौकणी दा कोट पंचायत में आता है क्षेत्र

यहां पर अक्षरधाम मंदिर बनाने के लोगों के विरोध के चलते मंदिर का निर्माण तो नहीं हो सका लेकिन अब अचानक से यहां पर हरे पेड़ों को काटने का क्रम शुरू हुआ है लेकिन कोई इस बारे में सही से नहीं जानता कि आखिर पेड़ काट कौन रहा है। वन सहकारी समिति खनियारा के प्रधान शुभकर्ण कपूर का इस बारे में कहना है कि उन्हें यहां पर पेड़ काटने की सूचना मिली थी, जिसपर उन्होंने मौके पर जाकर पेड़ काट रहे दो लड़कों को पेड़ काटने से रोका था। कपूर ने बताया कि इस बारे में किसी भी तरह की जानकारी उन्हें नहीं है कि पेड़ किसके आदेशों से काटे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग को भी इस बारे में सूचित किया गया जिसके बाद विभाग ने मौके पर जाकर रिपोर्ट तैयार की है।

इस बारे में डीएफओ धर्मशाला प्रवीण ठाकुर का कहना है कि उन्हें मामले की सूचना नहीं है। इस बारे में बात करने के लिए एसडीएम धर्मशाला से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। वहीं ग्राम पंचायत सौकणी दा कोट की प्रधान ममता का कहना है कि वह कुछ दिन से गांव में नहीं थीं इसलिए उन्हें मामले की कोई जानकारी नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले भी मैक्लोडगंज क्षेत्र में पेड़ों के काटने का मामला प्रदेश हाई कोर्ट में पहुंचा था। हाई कोर्ट ने धर्मशाला क्षेत्र में किसी भी तरह के हरे या सूखे हुए पेड़ काटने पर प्रतिबंध लगाया था। लेकिन अब एक बार फिर से धर्मशाला के साथ लगते अघंजर महादेव मंदिर की जमीन पर से दो दर्जन से अधिक पेड़ों पर कुल्हाड़ी चली है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। पेड़ किसने और क्यों काटे यह तो  पता चल जाएगा लेकिन प्रशासन का यह रवैया सीधे तौर पर सरकारी विभागों में तालमेल में कमी की ओर इशारा करता है।

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