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युवाओं को जड़ों से जोड़ने लिए वसुधा ने बनाया “मेरा गांव मेरी दुनिया”

युवाओं को जड़ों से जोड़ने लिए वसुधा ने बनाया “मेरा गांव मेरी दुनिया”

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वर्तमान में गांव और छोटे शहर युवाओं से खाली होते जा रहे हैं। खाली मकानों के बीच में केवल बुर्जुगों की उदास नजरें हैं और घर में फैल रहा है सन्नाटा। कई आंगन उन बच्चों की राह देख रहे हैं जहां कभी उनके कदम दौड़ा करते थे जहां बेवक्त बातें होती थी और खेल खेला जाता था। पढ़ाई के लिए जो घर से लनकले वो या तो शहर में बेरोज़गार लोगों की संख्या बढ़ा रहे हैं या किसी कॉपोरेट में जाकर शहर की भीड़ में अपनी जगह बनाने की दौड़ में खुद को खो रहे हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी से गोल्ड मेडलिस्ट रहीं मंडी की वसुधा “मेरा गांव मेरी दुनिया” नाम की एक संस्था चलाती हैं। वसुधा अपने कॉलेज के बाद एक मार्केटिंग कंपनी में काम करने लगी, धीरे धीरे उसे समझ आया कि इस तरह भागने से कुछ हासिसल नहीं हो रहा। खुद को और बेहतर समझने के लिए उसने अपनी जॉब से इस्तीफा देकर कुछ महीने घर रहना चुना। हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी और छोटी काशी मंडी में उसे एक अधूरापन और खालीपन दिखा। ये एक ऐसा क़स्बा होता जा रहा था जहां घर में कमरे तो थे लेकिन खाली, जहं रिटायर लोगों का एक समूह है लेकिन युवाओं के नाम पर वहां हैं जो बाहर नहीं जा सके।


एक ऐसा माहौल भारत के हर छोटे शहर और गांव में बना हुआ है अगर कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति गांव वापिस आया या उसने वहां कुछ शुरू किया ते उसे इसकी असफलता समझा जाने लगा। हर कोई शहर की ओर भागना चाहता है और एक इस जीवन पद्दति को ही विकास समझा जाने लगा। ऐसे में किसी भी युवा का वापिस अपने घर आना और मुश्किल हो गया है लेकिन वसुधा कहती है कि इसकी जड़ में एक और गहरी बात है कि गांव और छोटे शहरों में कोई अच्चा रोजगार का साधन नहीं है ना ही कोई ऐसा समूह है जो युवाओं अपनी को जड़ों से जोड़ने में सहयोग करें। दिल्ली में बैठकर मंडयाली, मालवी या राजस्थानी गाना सुनकर ही लोग खुश हो जाते हैं इसके आगे कदम बढ़ाने का ना कोइ साधन है ना ही साहस।

इसी दौरान वसुधा की मुलाक़ात नागेश्वर पांचाल से हुई जो इसी इस तरह के कुछ कार्य कर रहे थे और उन्हें आगे ले जाना चाहते थे। उन दोनों ने कुछ युवाओं के साथ मिलकर “मेरा गांव मेरी दुनिया” नाम का एक एनजीओ शुरू किया जिसका लक्ष्य भारत में विकेन्द्रीकरण और सेवा के जरिये समाज का सशक्तिकरण करना है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है मेरा गांव मेरी दुनिया के माध्यम से सबसे पहले युवाओं की क्षमता पर काम करके ऐसे अवसरों का निर्माण करना है जहां वो अपने क्षेत्र के लिए अपने क्षेत्र के लोगों के साथ काम कर सकें। सबकी भागीदारी और समझ को सम्मिलित करके गांव का विकास करने का उद्देश्य संस्था ने बनाया है।

‘मेरा गांव मेरी दुनिया’ ने वर्तमान में विद्यालय में परिवर्तन के लिए एक प्रोजेक्ट कदम शुरू किया है जहां पर शिक्षक, प्रधानाध्यापक और समाज के लोगों की क्षमता पर काम किया जा रहा है। प्रोजेक्ट नवोदय में पांचवी क्लास के बच्चों को नवोदय विद्यालय की तैयारी करवाई जाती है ताकि युवाओं को शिक्षा से जुड़ने का एक मंच मिले। इसके साथ-साथ आईना देखो में देश भर से 15 युवा 6 दिन के लिए एकत्रित होकर मेरा गांव मेरी दुनिया के तहत पर काम करते हैं। मेरा गांव मेरी दुनिया की पहल ‘आईना देखो’ एक ऐसा 6 दिवसीय आवासीय कार्यक्रम करती है जहां पूरे भारत से आए युवा खुद को अच्छे से समझ सकें कि उनके काम का समाज पर असर हो रहा है। हाल ही में ला मोंटेसरी स्कूल कल्हेली कुल्लू में कार्यक्रम का आय़ोजन किया गया जिसमें भारत के सात राज्यों से 15 चयनित युवाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में एक दिन सारे लोग गांव में अलग-अलग घरों में जाकर वहां रहते हैं औऱ उन्हे समझाते हैं। इससे युवाओं में मदद मांगने की झिझक कम होती है।

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