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न कभी तेल डाला न घी यहां फिर भी जलता रहता है दिया

न कभी तेल डाला न घी यहां फिर भी जलता रहता है दिया

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विश्व के सबसे धनी कहे जाने वाले इस मंदिर में कुछ ऐसे रहस्य भी हैं जिन्हें देख सुनकर भगवान वेंकटेश्वर की अलौकिकता पर विश्वास करना पड़ता है। उदाहरण के लिए वेंकटेश्वर जी के इस मंदिर में एक दिया हमेशा जलता रहता है, इसमें न तो कभी तेल डाला जाता है और न ही घी। कोई भी नहीं जानता कि यह दीपक कब और किसने जलाया था, क्योंकि यह वर्षों से इसी तरह जलता आ रहा है।

समुद्रतल से 3200 फीट की ऊंचाई पर स्थित तिरुमला की पहाड़ियों पर बना श्री वेंकटेश्‍वर मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। आन्ध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के तिरुपति में स्थित यह मंदिर भगवान विष्‍णु को समर्पित है। वेंकटेश्वर मन्दिर को दुनिया में सबसे अधिक पूजनीय स्थल कहा गया है। विश्‍व के सर्वाधिक धनी धार्मिक स्‍थानों में से एक यह स्‍थान भारत के सबसे अधिक तीर्थयात्रियों के आकर्षण का केंद्र है। इन्‍हें सात पहाड़ों का भगवान भी कहा जाता है। मंदिर के विषय में कई रहस्‍यात्‍मक कथाएं प्रचलित हैं। कहते हैं श्री वेंकटेश्वर की यह मूर्ति स्वयंभू है और स्वयं प्रकट हुई थी।

  • वेंकटेश्‍वर भगवान की प्रतिमा से जुड़ा अत्‍यंत ही आश्चर्यजनक रहस्‍य है कि उनकी प्रतिमा का तापमान सदैव 110 फॉरेनहाइट रहता है और प्रतिमा को पसीना भी आता है जिसे पुजारी समय-समय पर पोंछते रहते हैं।
  • भगवान बालाजी की मूर्ति पर अगर कान लगा कर सुना जाए तो आपको समुद्र की आवाज़ सुनाई देगी और इसी कारण वश इनकी मूर्ति हमेशा ही नम रहती है।

  • जब आप बालाजी की मूर्ति को गर्भ-गृह से देखेंगे तो भगवान की मूर्ति को मंदिर के गर्भ-गृह के मध्य में स्थित पाएंगे, लेकिन जब आप इसे बाहर आकर देखेंगे तो पाएंगे कि मूर्ति मंदिर की दाईं ओर स्थित है।
  • भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा पर एक खास तरह का पचाई कपूर लगाया जाता है, अगर इसे किसी भी पत्थर पर चढ़ाया जाय तो वह कुछ समय के बाद ही चटक जाता है किन्तु भगवान की प्रतिमा को कुछ नहीं होता।
  • प्रत्येक गुरुवार के दिन तिरुपति बालाजी को पूर्ण रूप से पूरा का पूरा चंदन का लेप लगाया जाता है और जब उसे हटाया जाता है तब वहां खुद-ब-खुद ही माता लक्ष्मी की प्रतिमा उभर आती है। यह आज तक नहीं पता चल पाया कि ऐसा क्यों होता है।

  • मंदिर के नियमों से जुड़ी एक प्रथा है जिसके अनुसार मंदिर से 23 किमी दूर बसे गांव के लोग ही इसके गर्भगृह में प्रवेश कर सकते हैं तथा केवल इसी गांव से भगवान के लिए फल, फूल, प्रसाद, भोग आदि आता है।
  • कहा जाता है कि वेंकेटेश्वर मंदिर के स्‍वामी की प्रतिमा पर लगे बाल असली हैं। ये बाल बहुत ही मुलायम हैं तथा कभी उलझते या झड़ते नहीं हैं।
  • मंदिर की मान्‍यता है कि यहां पर चढ़ाए गए फूलों और तुलसी पत्रों को भक्‍तों में न बांटकर मंदिर के पीछे बने कुएं में फेंक दिया जाता है। यही नहीं, इन पुष्पों तथा तुलसी के पत्तों को वापस मुड़कर देखा भी नहीं जाता है।

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