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ग्रामीणों ने मगरमच्छ को बचाया, उसे छोड़ने के लिए वन विभाग से मांगे 50 हजार रुपए

ग्रामीणों ने मगरमच्छ को बचाया, उसे छोड़ने के लिए वन विभाग से मांगे 50 हजार रुपए

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लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश स्थित लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Khiri) से एक बड़ा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां स्थित गांव मिदानिया में घुसे एक मगरमच्छ (Crocodile) को ग्रामीणों ने पकड़ लिया और छोड़ने के लिए वन विभाग से 50,000 रुपए मांगे। इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए दुधवा टाइगर रिज़र्व के अधिकारी अनिल पटेल ने कहा कि ग्रामीणों ने दावा किया कि जीवन दांव पर लगाकर मगरमच्छ पकड़ा इसलिए उन्हें पैसे चाहिए। हालांकि अधिकारी द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि मगरमच्छ नहीं छोड़ने पर ग्रामीणों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

यहां जानें पूरा मामला

वन विभाग की तरफ से इस बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि मिदानिया गांव से उन्हें फोन आया था कि गांव के तालाब में एक बड़े मगरमच्छ को देखा गया है। यह बच्चों और पालतू जानवरों की जान के लिए खतरा हो सकता है। इसके बाद वन विभाग ने एक टीम को मगरमच्छ का रेस्क्यू करने के लिए गांव में भेजा। बतौर रिपोर्ट्स, अंधेरा हो जाने की वजह से टीम ने उस दिन काम नहीं शुरू किया और मगरमच्छ के रेस्क्यू की योजना बुधवार सुबह तक टाल दी। इसके बाद बुधवार को सुबह गांव से एक और फोन आया, जिसमें बताया गया कि वन विभाग के कर्मियों का इंतजार करते वे थक गए थे, इसलिए उन लोगों ने खुद ही मगरमच्छ का रेस्क्यू करने का फैसला कर लिया।

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इसके बाद जब वन विभाग की टीम जब गांव पहुंची तो उन्हें ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने तालाब का पानी खाली करा मगरमच्छ को एक रस्सी से बांध रखा था। गांव वालों ने बताया कि इस काम के लिए उन्होंने 15 लोगों की एक टीम बनाई थी। गांव के प्रधान शर्मा प्रसाद ने कहा कि उन्होंने मगरमच्छ को पकड़ने में अपनी जान जोखिम में डाली है।ऐसे में उन्हें इसका मुआवजा मिलना चाहिए। अनिल पटेल ने बताया कि ग्रामीणों ने मगरमच्छ को छोड़ने के बदले में 50 हजार रुपए की मांग की। घंटो बहस के बाद भी ग्रामीण नहीं माने। बाद में पुलिस गांव में पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने मगरमच्छ को नहीं छोड़ा तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद गांव के लोगों ने मुआवजे की मांग को विराम दे दिया। वहीं, बाद में मगरमच्छ को ग्रामीणों के कब्जे से लेने के बाद उसे घाघरा नदी में छोड़ दिया गया।

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