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आवाज बुलंदः Re-Employment और Extension पर कर्मचारियों की तैनाती की हो जांच

आवाज बुलंदः Re-Employment और Extension पर कर्मचारियों की तैनाती की हो जांच

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लोकिन्दर बेक्टा/ शिमला। पूर्व की कांग्रेस सरकार में री-एंप्लाइमेंट और एक्सटेंशन पर कर्मचारियों और अफसरों की तैनाती में घोटाला हुआ है। राज्य में सत्तासीन हुई नई बीजेपी सरकार को इस घोटाले की जांच करनी चाहिए और इसके लिए पूर्व सरकार की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। यह आरोप हिमाचल प्रदेश कर्मचारी परिसंघ के अध्यक्ष विनोद कुमार ने लगाए हैं। विनोद कुमार ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार में जिन-जिन अफसरों को री-एंप्लाइमेंट और एक्सटेंशन दी, वे केवल अपात्र थे और सरकारी खजाने से अपनी जेब भरते रहे।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से ये तैनातियां हुई थीं, उसके लिए पूर्व सरकार की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उनका कहना था कि नई सरकार ने सत्ता संभालते ही री-एंप्लाइमेंट और एक्सटेंशन को तत्काल प्रभाव से रद करने का आदेश दिया है और इस फैसले का वे स्वागत करते हैं। विनोद कुमार ने सरकार से मांग की कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने जिन-जिन कर्मचारियों को प्रतिषोध की भावना से प्रताड़ित किया है, उनकी बहाली की जाए। उन्होंने कहा कि कई विभागों, निगमों और बोर्डों में कर्मचारी नेताओं को तंग किया गया है और उन्हें निलंबित और कुछ को तो डिसमिस किया गया है, उनकी बहाली की जाए।

भ्रष्टाचारी अफसरों की बनें सूची, सर्विस रिकॉर्ड की हो जांच

विनोद कुमार ने कहा कि राज्य की सरकारी व्यवस्था भ्रष्टाचार मुक्त हो, इस दिशा में राज्य सरकार को कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी सरकार की तर्ज पर ऐसे अफसरों की सूची तैयार करनी चाहिए, जो भ्रष्टाचार में लिप्त अफसर रहे हैं। यही नहीं उनकी सरकार से मांग है कि अहम पदों पर बिठाए जाने वाले अफसरों के पिछले सर्विस रिकॉर्ड को भी जरूर देखना चाहिए। उनका कहना था कि अफसरों की तानाशाही प्रवृत्ति के कारण सरकार की छवि खराब होती है और इस पर अंकुश लगना चाहिए।उनका कहना था कि इससे सरकार की छवि खराब होती है।

6 माह तक कोई वित्तीय मांग नहीं रखेगा परिसंघ 

परिसंघ अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति खराब है और नई सरकार ने फिर भी बिना मांगे कर्मचारियों और पेंशनरों को 3 फीसदी डीए जारी किया है। इसके लिए वे नई सरकार के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि परिसंघ ने फैसला लिया है कि वे अगले 6 माह तक नई सरकार से कोई भी वित्तीय मांग नहीं रखेंगे। उनका कहना था कि राज्य की आर्थिक स्थिति ठीक करने में परिसंघ सरकार के साथ है और इसके लिए वह समय समय पर सरकार को सुझाव भी देंगे।

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