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संयम की अगली नियंत्रण रेखा

संयम की अगली नियंत्रण रेखा

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कही अनकही/अनल पत्रवाल। वॉल्वो-डीलक्स के नाम पर दिल्ली तक अपने बिजनेस की गाड़ी को दौड़ा रहे निजी बस ऑपरेटरों को जीएस बाली ने कड़ा संदेश तो दिया है, लेकिन मुश्किल अब यहां से शुरू होती है। बाली निजी ऑपरेटरों की पहुंच, जरूरतों और चुनौतियों को भी जानते हैं और उनके मिजाज और पहुंच को भी। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ताजे सबक के बाद निजी ऑपरेटरों के इस कारोबार की फैक्‍ट्री बंद हो जाएगी बल्कि उनके दोगुनी ताकत से आगे आने का डर है। यदि ऐसा हुआ तो फिर बाली के संयम की अगली नियंत्रण रेखा क्‍या होगी ?

busजाहिर है बाली बार-बार निजी ऑपरेटरों के खिलाफ यह नहीं करना चाहेंगे जो उन्‍हें इस बार करना पड़ा है, लेकिन निजी ऑपरेटर अपने डिजाइन नहीं आजमाएगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। यह भी सच्चाई है कि बाली, निजी ऑपरेटरों के साथ तनाव लेकर जी सकते हैं, लेकिन टकराव लेकर नहीं। बाली की भी कोशिश होगी कि वह इस मसले को टालें और जल्‍द से जल्‍द निजी बस ऑपरेटरों से संवाद कर इसे कानूनी जामा पहनाते हुए पर्यटन विकास और समृद्धि की तरफ लाएं। ऐसा न होने पर दोनों को ही होने वाले नुकसान ज्‍यादा बड़े होंगे।

gs-bali-2निजी ऑपरेटरों की इन बसों को लेकर जीएस बाली का आशावाद तो बहुत पहले खत्म हो गया था जब उनकी आंखों के सामने निजी ऑपरेटर एचआरटीसी से दो कदम आगे वॉल्वों-डीलक्स को सड़कों पर दौड़ा रहे थे। बाली चाहते तो उस वक्त भी यही तेवर दिखा सकते थे, जो उन्होंने दो दिन पहले दिखाए, लेकिन यह भी सच्चाई है कि बाली यह जानते हैं कि कब क्या करना है। शायद कई पैमानों पर बाली के लिए यही सही मौका था जब अपने संयम की नियंत्रण रेखा निजी ऑपरेटरों को दिखा सकते थे, जैसा उन्होंने किया भी।

gafoorबाली के लिए सख्‍त दिखना न केवल उनकी राजनीति के लिए जरूरी था बल्कि प्रदेश में अपने रसूख को बनाए रखने के लिए भी जरूरी था। वॉल्वों बसों पर कार्रवाई का रहस्‍यमय और दावों प्रतिदावों से भरे होना लाजिमी है क्‍योंकि इस तरह की कार्रवाई सामने वाले को प्रत्‍यक्ष नुकसान से अधिक इस बात पर निर्भर करती हैं कि इनसे किस तरह के संदेश दिए जाते हैं। इस पैमाने पर बाली की दो दिन पहले की कार्रवाई साहसिक और संयमित थी। कार्रवाई निजी बस ऑपरेटरों के खिलाफ थी और उनके पास वैद्य दस्तावेज नहीं थे इसलिए तात्कालिक प्रतिक्रिया के लिए कुछ नहीं था। इस तरह की कार्रवाई पहले भी हलके स्तर पर होती रही है अलबत्‍ता सीधी कार्रवाई करने के साथ इन्‍हें स्‍वीकारने का राजनीतिक साहस इस अभियान को इस धंधे के खिलाफ पिछले अभियानों से अलग जरूर करता है।

इस अभियान के कूटनीतिक पहलू रणनीतिक पक्षों से ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण हैं जिन्‍होंने बाली को दो टूक करते हुए दिखने पर बाध्‍य किया है।

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