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मतदाता सूचियों में गड़बड़झाला : Husband एक वार्ड में तो Wife दूसरे में

मतदाता सूचियों में गड़बड़झाला : Husband एक वार्ड में तो Wife दूसरे में

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voter lists : सूचियों से नाम गायब, राजनीतिक दलों में छिड़ा संग्राम

voter lists : शिमला। नगर निगम शिमला के चुनाव की अभी घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इसकी मतदाता सूचियों को लेकर संग्राम छिड़ गया है। मतदाता सूचियों से हजारों की तादाद में नाम गायब होने का मामला उठने के बाद इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। इस मुद्दे पर विपक्षी बीजेपी और माकपा ने सीधे-सीधे सरकार को घेरा है और आरोप लगाया है कि सरकार की शह पर प्रशासन ने नाम गायब किए और कई वार्डों में दूसरे वार्डों के मतदाताओं के नाम डाल दिए।

आम जनता को दर्ज करवानी होगी आपत्ति

हैरानी इस बात की है कि मामला उजागर होने के बाद प्रशासन और राज्य निर्वाचन आयोग गल्तियों को ठीक करने के लिए आम लोगों से ऑब्जेक्शन फाइल करने को कह रहा है। यहां यह सवाल पैदा होता है कि मतदाता तो यह सोच बैठा है कि जहां वह वोट डालता है, उसका वहीं पर नाम होगा,लेकिन उसे नहीं मालूम कि उसका नाम बिना किसी कारण और आग्रह के काटा जा चुका है। नाम किसी और ने नहीं बल्कि खुद प्रशासन ने काटा है। ऐसे में यह जिम्मेदारी प्रशासन की बनती है कि गलतियों को खुद ठीक करे और आम जनता को कार्यालयों की दौड़ न लगाए।


कई मतदाता नाम का पता करने के लिए कार्यालय को भी जा रहे हैं, लेकिन वहां पर उन्हें नाम नहीं मिल रहे हैं। कई वार्डों की मतदाता सूचियों की पड़ताल करने के बाद देखा गया कि एक वार्ड के नाम दूसरे वार्ड में डाले गए हैं।

इसके अलावा एक परिवार के सभी मतदाताओं के नाम नहीं है। यही नहीं, पति का नाम एक वार्ड में है तो पत्नी का नाम किसी दूसरे वार्ड में है। ऐसे में यह लोगों के लिए परेशानी करने वाला काम हो गया है। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग ऐसी गल्तियों के लिए ऑब्जेक्शन करने को कह रहा है। ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि जब मतदाताओं को पता ही नहीं है कि उनका नाम कटा है या किसी दूसरे वार्ड में डाल दिया गया है तो वह कैसे ऑब्जेक्शन फाइल कर सकता है।

वहीं हजारों नाम काटे गए और सैंकड़ों नाम एक वार्ड से दूसरे वार्ड में डाले गए हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन के कर्मचारियों की गल्ती का खामियाजा वे क्यों भुगते। वोटों को चैक करने के लिए कर्मचारी घर-घर तो गए नहीं और अब खुद ही घर बैठे नाम काट दिए। लोगों ने इसे घोर लापरवाही बताया है और इसके लिए दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

बीजेपी व माकपा ने सरकार को घेरा

उधर, इस मुद्दे पर अब राजनीति भी हो गई है। बीजेपी और माकपा ने इसके लिए सीधे-सीधे सरकार को घेरा है। उनका आरोप है कि सरकार की शह पर प्रशासन ने यह कार्रवाई की है और लोगों के नाम काटे हैं। उन्होंने कहा है कि वोटर लिस्ट से नाम कटने से परेशानी लोगों को हो रही है और उन्हे अब ऑब्जेक्शन फाइल करने को कहा जा रहा है। जबकि गलती प्रशासन की है। ऐसे में प्रशासन को खुद सूची को ठीक करना चाहिए और नामों को शामिल करना चाहिए। ऐसा न करने की सूरत में इन दलों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

उधर, कांग्रेस ने भी मतदाता सूचियों से नाम गायब होने पर हैरानी जताई है। उसने भी जल्द से जल्द सूचियों को ठीक करने की मांग की है और इसमें अपने स्तर पर ही सुधार करने की माग की है। बहरहाल, चुनाव से पहले ही राजधानी में संग्राम छिड़ गया है और इसकी गूंज चुनाव में भी सुनाई देगी।

CM @ वोट के नाम पर लोगों को बांटने वाले देशद्रोही

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