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युद्ध व हिंसा पर काबू पाने में सक्षम हैं भारतीय मानवीय मूल्यःआचार्य देवव्रत

युद्ध व हिंसा पर काबू पाने में सक्षम हैं भारतीय मानवीय मूल्यःआचार्य देवव्रत

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चंडीगढ़। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि भारतीय मूल्य विश्व में पनप रहे आंतक, संघर्ष व हिंसा की चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि ये मूल्य अहिंसा, सत्य, आपसी भाईचारे व मानवता की शिक्षा देते हैं। राज्यपाल आज चंडीगढ़ स्थित में पंचनाद अनुसंधान केन्द्र में 26वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल्यों प्रणाली की दृढ़ता जो वेदों में उल्लेखित है, आज भी हमारे समाज में प्रचलित है, उन्होंने कहा कि वैदिक परम्पराओं में विश्व को मानवता का संदेश देने के लिए स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि अन्यों से वही अपेक्षा रखें जैसा हम अपने लिए चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे ऋषियों व मुनियों ने इसी बात को आधार मानते हुए मूल्यों का निर्धारण किया। वैदिक समय की परम्पराओं का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय विचारों के आदान-प्रदान पर विशेष महत्व दिया जाता था। ऋषियों व मुनियों की जिज्ञासा का ही परिणाम devvrat-2था कि उच्च मूल्यों का विकास हुआ और उस समय विभिन्न प्रकार के मत सामने आने के बावजूद आपसी द्वेष की भावना नहीं होती थी।

उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पतंजलि और चरख जो समकालीन थे उनकी सोच और विचारों में भिन्नता थी लेकिन विरोधाभास नहीं। अपने अध्यक्षीय संबोधन में शिक्षाविद दीना नाथ बतरा ने मैकाले, मैक्स मयूलर तथा मार्क जैसे विदेशियों द्वारा भारतीय शिक्षा प्रणाली को पहुंचाए गए नुक्सान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस बारे साक्ष्य उपलब्ध हैं कि वेदों के मूल भावना को नष्ट करने के लिए उन्हें धन दिया जाता था।  उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आज उचित समय है कि शिक्षा प्रणाली में पुरातन भारतीय मूल्यों को पुनः शामिल किया जाए। पंचनाद अनुसंधान केंद्र के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. के. एस. आर्य ने प्राचीन धर्म ग्रंथों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया ताकि भावी पीढ़ी इनके बारे में जानकारी प्राप्त कर सके।

पंचनाद के निदेशक प्रो. बी.के. कुठियाला ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा पंचनाद के उद्देश्यों व सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मुख्यतः आपस में संवाद की परंपरा से ही समाज जीवित है। 

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