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Sainik Cafe विवादः स्टे ऑर्डर के बाद भी सुलझ नहीं पाया मामला

Sainik Cafe विवादः स्टे ऑर्डर के बाद भी सुलझ नहीं पाया मामला

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धर्मशाला। वॉर मैमोरियल स्थित सैनिक कैफे प्रकरण में हिमाचल हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद भी मामला नहीं सुलझ पाया है। प्रशासन कैफे सील करने के बाद ऑर्डर आने की बात कर रहा है, वहीं पार्थी इस मामले में दोबारा हाईकोर्ट की शरण में जाने का ऐलान किया है व कोर्ट के आदेशों की अवमानना का केस दायर करने की बात कही है। दूसरी तरफ एसडीएम धर्मशाला का कहना है कि ऑर्डर कैफे सील करने के बाद आए हैं। ऐसे में अब एडवोकेट जनरल से इस बारे राय ली जाएगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट के इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेशों के बाद आज प्रार्थी ने एसडीएम आदि को ऑर्डर की कापी मुहैया करवाई। लेकिन, कैफै सील होने के बाद ऑर्डर आने की बात कह कर एसडीएम ने कार्रवाई रोकने से मना कर दिया। ऐसे में अब यह मामला दोबारा हाईकोर्ट जा सकता है।


  • एसडीएम बोले ऑर्डर से पहले सील कर दिया था कैफे
  • कैफे संचालक ने कोर्ट के आदेशों की अवमानना का जड़ा आरोप
  • दोबारा हाईकोर्ट की शरण में जाने का किया ऐलान

बता दें कि वॉर मैमोरियल स्थित सैनिक कैफे प्रकरण में हिमाचल हाईकोर्ट स्टे देते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। 9 जनवरी को एसडीएम धर्मशाला ने सैनिक कैफे को खाली करने व किराए के बकाया 13000 वसूल पाने के आदेश दिए थे, जिसकी तामील करने के लिए 13 जनवरी को नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे थे,लेकिन वाद-विवाद के बीच वह इसमें सफल नहीं हो पाए थे। इस बीच कैफे का संचालन करने वाले रणजीत कुमार ने 14 जनवरी को हाईकोर्ट का रुख करते हुए एसडीएम धर्मशाला के फैसले पर स्टे देने का आग्रह किया था। उसी पर आज सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एसडीएम के आदेशों पर स्टे दे दिया है। हालांकि,आज सुबह कैफे को सील कर दिया गया था। इस बीच अब हाईकोर्ट का निर्णय आने से यथास्थिति बरकरार हो जाएगी। लेकिन, अभी तक एसडीएम तक हाईकोर्ट के फैसले की प्रति नहीं पहुंच पाई है। याद रहे कि वर्ष 1990 में वार्ड ऑफ एक्स सर्विस मैन रणजीत सिंह को सैनिक कैफे बाकायदा एक एग्रीमेंट के तहत लीज पर मिला था। यह लीज एक साल के लिए थी, लेकिन बाद में इसाका नवीकरण तो नहीं हुआ पर उससे लीज मनी बाकायदा ली जाती रही। उसका मतलब यही माना गया कि यह नवीकरण ही है। यह सब वर्ष 2014 तक ऐसे ही रहा।

हालांकि इस बीच 1997-98 में एक मर्तबा इसे खाली करवाने की कार्रवाई शुरू हुई थी पर वर्ष 2001 में आए फैसले में रणजीत सिंह को राहत मिल गई थी। उसके बाद वर्ष 2014 में फिर से इसे खाली करवाने की कार्रवाई शुरू हुई थी। उधर, एसडीएम श्रवण मांटा ने कहा कि ऑर्डर आने से पहले कैफे सील कर दिया गया था। इस बारे एडवोकेट जनरल से राय ली जा रही है, उसके बाद ही कुछ फैसला लिया जाएगा।

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