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जब अटल जी ने इशारों इशारों में दिया था बाबरी विध्वंस का आदेश, सुनें भाषण

जब अटल जी ने इशारों इशारों में दिया था बाबरी विध्वंस का आदेश, सुनें भाषण

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नई दिल्ली। भारतीय इतिहास में बाबरी मस्जिद का विध्वंस आजादी के बाद से अब तक की सबसे बड़ी और महत्‍वपूर्ण घटनाओं में शुमार है। इस घटना ने देश को सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्‍तरों पर बदल कर रख दिया था। 6 दिसंबर 1992 की तारीख आज भी भारत भर के लोगों के दिलों में घर कर गई है। इस दिन करीब 10 लाख कारसेवकों द्वारा अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ढहा दिया गया।

गौरतलब है कि इस विध्वंस की घटना में कई सारे बीजेपी नेताओं का नाम सामने आया था। हालांकि अभी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही है इस वजह से किसी को आरोपी नहीं कहा जा सकता। लेकिन इस मुद्दे से जुड़े अटल बिहारी वाजपेयी के एक भाषण को हमेशा से इस घटना से जोड़ कर देखा जाता रहा है।


बता दें कि यह भाषण अटल जी ने बाबरी विध्वंस से एक दिन पहले लखनऊ में हजारों कारसेवकों के सामने दिया था। इस भाषण सुनकर ऐसा लगता है कि वह कुल मिलाकर हमेशा राजधर्म निभाने वाले अटल उस दिन धर्मराज की भूमिका में थे। आप इस भाषण में सुन सकते हैं कि अटल जी कह रहे हैं कि, ‘वहां (अयोध्या) नुकीले पत्थर निकले हैं। उन पर तो कोई नहीं बैठ सकता तो जमीन को समतल करना पड़ेगा, बैठने लायक करना पड़ेगा।’

अटल जी सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहते हैं कि, ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अर्थ मैं बताता हूं। वो कारसेवा रोकना नहीं है। सचमुच में सुप्रीम कोर्ट ने हमें अधिकार दिया है कि हम कारसेवा करें। रोकने का तो सवाल ही नहीं है। कल कारसेवा करके अयोध्या में सर्वोच्च न्यायालय के किसी निर्णय की अवहेलना नहीं होगी। कारसेवा करके सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान किया जाएगा।’

उन्होंने आगे कहा कि, ‘सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि आप भजन कर सकते हैं। कीर्तन कर सकते हैं। अब भजन एक व्यक्ति नहीं करता। भजन होता है तो सामूहिक होता है और कीर्तन के लिए तो और भी लोगों की आवश्यकता होती है। भजन और कीर्तन खड़े-खड़े तो नहीं हो सकता। कब तक खड़े रहेंगे? यज्ञ का आयोजन होगा तो कुछ निर्माण भी होगा। कम से कम वेदी तो बनेगी।’

उन्होंने आगे कहा कि, ‘वहां नुकीले पत्थर निकले हैं। उन पर तो कोई नहीं बैठ सकता तो जमीन को समतल करना पड़ेगा, बैठने लायक करना पड़ेगा। यज्ञ का आयोजन होगा तो कुछ निर्माण भी होगा। कम से कम वेदी तो बनेगी। मैं नहीं जानता कल वहां क्या होगा। मैं नहीं जानता कल वहां क्या होगा। मेरी अयोध्या जाने की इच्छा है, लेकिन मुझे कहा गया है कि तुम दिल्ली रहो।’

https://www.youtube.com/watch?v=IuMnPJEpNGI

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