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Water Tanks की हो घेराबंदी

Water Tanks की हो घेराबंदी

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शिमला। पानी की टैंकों की सुरक्षा के लिए सरकार गंभीर हो गई है। लोगों की सेहत के साथ किसी भी तरह लापरवाही अब नहीं होगी। शनिवार को शिमला में आयोजित बैठक में मुख्य सचिव वीसी फारका ने इसके लिए वकायदा दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं। मुख्य सचिव ने विशेषकर सभी जल भंडारण टैंकों की सुरक्षा के लिए चार दीवारी लगाने तथा तालाबंदी करने पर विशेष बल दिया। गौर रहे कि प्रदेश सरकार राज्य में सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए अभी से तैयारियों में जुट गई है। राज्य के शहरों अथवा कस्बों कहीं पर भी पेयजल को लेकर किसी प्रकार की समस्या न आए, इसके लिए सीएम ने अधिकारियों को अभी से प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

  • मुख्य सचिव वीसी फारका ने जारी किए दिशा निर्देश
  • जल भंडारण टैंकों की जाए तालाबंदी, चारदीवारी भी लगाई जाए

राज्य की समस्त पेयजल योजनाओं तथा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों की स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्य सचिव वीसी फारका की अध्यक्षता में शिमला में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई।

water-tankबैठक के दौरान मुख्य सचिव ने राज्य के विभिन्न जिलों में कार्यरत सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के मुख्य अभियन्ताओं तथा अधीक्षण अभियंताओं के साथ वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से राज्य की सभी मुख्य जलापूर्ति तथा मल-निकासी परियोजनाओं की जानकारी हासिल की। मुख्य सचिव ने पीने के पानी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने पर बल देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित बनाया जाए कि एक भी जलापूर्ति योजना का पानी मल निकासी लाइनों अथवा अन्य कारणों से दूषित न हो। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक वर्षा न होने से पानी के स्त्रोतों के दूषित हो की आशंका बनी रहती है। उन्होंने निर्देश दिए कि जन-स्वास्थ्य को लेकर किसी प्रकार की कोताही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों तथा इंजीनियरों को नियमित तौर पर सभी जलापूर्ति योजनाओं से पानी के सैंपल लेकर इनकी रिपोर्ट नियमित रूप से सरकार को भेजने के लिए भी कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि कोई भी योजना अथवा पाइपलाइन मल निकासी लाइनों से दूषित नहीं होनी चाहिए और मुख्य लाइन से सीवरेज का कोई कनेक्शन न दिया जाए।

  फारका को मंडी अंचल के मुख्य अभियंता द्वारा वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से अवगत करवाया गया कि जिला की सभी जलापूर्ति योजनाएं सुचारु ढंग से कार्य कर रही हैं। मंडी तथा कुल्लू में जिला स्तर पर दो प्रयोगशालाएं हैं, जिनमें समय-समय पर पानी के सैंपलों का परीक्षण करवाया जाता है।

  • पानी की सुरक्षा को लेकर प्रदेश सरकार गंभीर
  • जन-स्वास्थ्य को लेकर कोताही को बर्दाश्त नहीं

उन्होंने जानकारी दी कि जिले में पीलिया के मामले पानी के कारण नहीं थे, बल्कि अन्यत्र स्थानों से आए लोगों में पाए गए थे। धर्मशाला अचंल के मुख्य अभियंता ने जानकारी दी कि कांगड़ा तथा चंबा जिलों में 978 जलापूर्ति योजनाएं हैं और किसी भी भाग से सूखे की समस्या को लेकर शिकायत नहीं आई है। जिलों के 75 प्रतिशत जल भंडारण टैंकों में तालाबंदी तथा 60 प्रतिशत टैंकों की फेन्सिग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। कांगड़ा जिला में एक जिला स्तरीय तथा सात उपमंडल स्तरीय प्रयोगशालाएं हैं, जबकि चंबा में एक जिला स्तर पर व दो उपमंडल स्तर पर कार्य कर रही हैं। बैठक में सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख अभियन्ता अनिल भारी, विशेष सचिव हंसराज चौहान, व मनमोहन जस्सल सहित शिमला नगर निगम व सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

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