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श्रम संगठनों की दो टूक, बुलाया है तो सुझावों को माना जाए

श्रम संगठनों की दो टूक, बुलाया है तो सुझावों को माना जाए

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शिमला। प्रदेश के अगले वित्त वर्ष का बजट कैसा हो, इसे लेकर वित्त विभाग ने श्रम संगठनों के साथ चर्चा की है। इस दौरान श्रम संगठनों ने वर्ष 2017-18 के बजट में मजदूरों को आर्थिक लाभ देने और इसके लिए बजट में प्रावधान करने पर चर्चा की। बैठक में सीटू ने सरकार से आग्रह किया कि बैठक की मात्र औपचारिकता न की जाए। बैठक में दिए सुझाव को माना जाए व इसके लिए बजट में प्रावधान किया जाए। बैठक में श्रम विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। बैठक में मजदूर संगठनों ने हिमाचल के मजदूरों को पंजाब के बराबर वेतन देने की मांग की। इसके साथ-साथ न्यूनतम वेतन को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के साथ जोड़ा जाए। बैठक के दौरान मजदूर संगठन सीटू ने आंगनबाड़ी वर्कर्ज का मुद्दा भी उठाया और कहा कि आंगनबाड़ी वर्करज एवं हेल्परज के लिए वर्ष 2014-15 में 50 फीसदी वेतन बढ़ाने की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक इसे लागू नहीं किया गया है।


  • वित्त विभाग ने अगले वित्त वर्ष के बजट पर बिठाकर मांगे सुझाव
  • मजदूर संगठनों ने पंजाब के बराबर वेतन देने की उठाई है मांग
  • न्यूनतम वेतन को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के साथ जोड़ा जाए

सीटू ने उन्हें एरियर सहित बढ़ा हुआ वेतन देने की मांग की। सीटू ने आंगनबाड़ी वर्करज के लिए 7500 रुपए और हेल्परज़ को 4000 रुपए मासिक वेतन देने का मुद्दा भी उठाया। सीटू के राज्य अध्यक्ष जगत राम ने कहा कि वित्त विभाग के साथ हुई बैठक में सीटू ने कई मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि बैठक में मिड डे मील, आशा वर्करज, जल रक्षकों के लिए सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन 6000 रुपए लागू करने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के मुताबिक स्कीम वर्करज को स्थाई किया जाए और उनके लिए ग्रेच्युटी व पेंशन योजना लागू की जाए। सीटू नेता ने कहा कि उन्होंने मजदूरों के वेतन बढ़ोतरी व अन्य लाभ देने के लिए लिखित सुझाव दिए हैं और इन मुद्दों पर चर्चा भी की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मजदूरों को सबसे कम वेतन दिया जाता है। उन्होंने औद्योगिक मजदूरों को न्यूनतम वेतन से 30 फीसदी अधिक वेतन देने की वकालत की।

इसके साथ-साथ सुप्रीमकोर्ट के 26 अक्टूबर 2016 के समान काम के समान वेतन के फैसले को लागू करने की भी मांग की।  जगत राम ने राज्य में आऊटसोर्सिंग पर लगे कर्मचारियों को स्थाई करने का मामला भी उठाया और इसके लिए स्थाई नीति बनाने की मांग की। उन्होंने श्रम विभाग में 118 खाली पड़े पदों को तुरंत भरने का आग्रह किया, ताकि मजदूरों को प्रतिदिन आने वाली समस्याओं को हल किया जा सके। सीटू ने सरकार से आग्रह किया कि बैठक की मात्र औपचारिकता न की जाए। बैठक में दिए सुझाव को माना जाए व इसके लिए बजट में प्रावधान किया जाए।

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