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काल भैरव अष्टमी पर क्या करें क्या नहीं, पढ़ें

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भगवान भैरव को भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है। काल भैरव जयंती पर इनकी पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान भैरव को कई रूपों में पूजा जाता है। काल भैरव जयंती पर कुछ आसान उपाय कर आप भगवान काल भैरव को प्रसन्न कर सकते हैं। जानिए इस दिन क्या करें और क्या नहीं …

  • काल भैरव जयंती के दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए।
  • अन्न ग्रहण न करें। ये नियम केवल उनके लिए हैं जो व्रत करेंगे।
  • गंदगी न करें। घर की साफ-सफाई करें।
  • कुत्ते को मारे नहीं। संभव हो तो कुत्ते को भोजन कराएं।
  • नमक न खाएं। नमक की कमी महसूस होने पर सेंधा नमक खा सकते हैं।
  • माता-पिता और गुरु का अपमान न करें।
  • बिना भगवान शिव और माता पार्वती के काल भैरव पूजा नहीं करना चाहिए।
  • इस रात में सोना नहीं चाहिए। संभव हो तो जागरण करें।

इन उपायों से करें काल भैरव को प्रसन्न :

काल भैरव अष्टमी को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद कुशा (एक प्रकार की घास) के आसन पर बैठ जाएं। सामने भगवान काल भैरव की तस्वीर स्थापित करें व पंचोपचार से विधिवत पूजा करें। इसके बाद रूद्राक्ष की माला से नीचे लिखे मंत्र की कम से कम पांच माला जाप करें तथा भैरव महाराज से सुख-संपत्ति के लिए प्रार्थना करें।

मंत्र- ‘ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम:’

काल भैरव अष्टमी पर किसी ऐसे भैरव मंदिर में जाएं, जहां कम ही लोग जाते हों। वहां जाकर सिंदूर व तेल से भैरव प्रतिमा को चोला चढ़ाएं। इसके बाद नारियल, पुए, जलेबी आदि का भोग लगाएं। मन लगाकर पूजा करें। बाद में जलेबी आदि का प्रसाद बांट दें। याद रखिए अपूज्य भैरव की पूजा से भैरवनाथ विशेष प्रसन्न होते हैं।

काल भैरव अष्टमी को भगवान काल भैरव की विधि-विधान से पूजा करें और नीचे लिखे किसी भी एक मंत्र का जाप करें। कम से कम 11 माला जाप अवश्य करें।

ॐ काल भैरवाय नम:।
ॐ भयहरणं च भैरव:।
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं।
ॐ भ्रां काल भैरवाय फट्

काल भैरव अष्टमी की सुबह भगवान काल भैरव की उपासना करें और शाम के समय सरसों के तेल का दीपक लगाकर समस्याओं से मुक्ति के लिए प्रार्थना करें।

काल भैरव अष्टमी को एक रोटी लें। इस रोटी पर अपनी तर्जनी और मध्यमा अंगुली से तेल में डुबोकर लाइन खींचें। यह रोटी किसी भी दो रंग वाले कुत्ते को खाने को दीजिए। इस क्रम को जारी रखें, लेकिन सिर्फ हफ्ते के तीन दिन (रविवार, बुधवार व गुरुवार)। यही तीन दिन भैरवनाथ के माने गए हैं।

काल भैरव अष्टमी पर 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ॐ नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं साथ ही एकमुखी रुद्राक्ष भी अर्पण करें। इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

अगर आप कर्ज से परेशान हैं तो काल भैरव अष्टमी की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव की पूजा करें। उन्हें बिल्व पत्र अर्पित करें। भगवान शिव के सामने आसन लगाकर रुद्राक्ष की माला लेकर इस मंत्र का जाप करें।मंत्र- ॐ ऋणमुक्तेश्वराय नम:

काल भैरव अष्टमी के एक दिन पहले उड़द की दाल के पकौड़े सरसों के तेल में बनाएं और रात भर उन्हें ढंककर रखें। सुबह जल्दी उठकर सुबह 6 से 7 बजे के बीच बिना किसी से कुछ बोलें घर से निकलें और कुत्तों को खिला दें।

काल भैरव अष्टमी पर सरसों के तेल में पापड़, पकौड़े, पुए जैसे पकवान तलें और गरीब बस्ती में जाकर बांट दें। घर के पास स्थित किसी भैरव मंदिर में गुलाब, चंदन और गुगल की खुशबूदार 33 अगरबत्ती जलाएं।

सवा किलो जलेबी भगवान भैरव नाथ को चढ़ाएं और बाद में गरीबों को प्रसाद के रूप में बांट दें। पांच नींबू भैरवजी को चढ़ाएं। किसी कोढ़ी, भिखारी को काला कंबल दान करें।

सवा सौ ग्राम काले तिल, सवा सौ ग्राम काले उड़द, सवा 11 रुपए, सवा मीटर काले कपड़े में पोटली बनाकर भैरवनाथ के मंदिर में काल भैरव अष्टमी पर चढ़ाएं।

काल भैरव अष्टमी की सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान काल भैरव के मंदिर जाएं और इमरती का भोग लगाएं। बाद में यह इमरती दान कर दें। ऐसा करने से भगवान काल भैरव प्रसन्न होते

काल भैरव अष्टमी को समीप स्थित किसी शिव मंदिर में जाएं और भगवान शिव का जल से अभिषेक करें और उन्हें काले तिल अर्पण करें। इसके बाद मंदिर में कुछ देर बैठकर मन ही मन में ॐ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।

– पंडित दयानन्द शास्त्री, (ज्योतिष-वास्तु सलाहकार) उज्जैन, मध्यप्रदेश 

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