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कार्तिक पूर्णिमा : क्या करें दान, पढ़े यहां

कार्तिक पूर्णिमा : क्या करें दान, पढ़े यहां

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कार्तिक मास बहुत पुण्य प्रदान करने वाला मास है। इस माह की पूर्णिमा भी विशेष है। 22 नवंबर को दोपहर में ही 12 बजकर 55 मिनट पर पूर्णिमा आरंभ होकर 23 नवंबर को 11 बजकर 11 मिनट पर समाप्त हो जाएगी।सनातन धर्म में पूर्णिमा को शुभ, मंगल और फलदायी माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने अपना पहला अवतार लिया था। वे मत्स्य यानी मछली के रूप में प्रकट हुए थे। वैष्णव परंपरा में कार्तिक माह को दामोदर माह के रूप में भी जाना जाता है। बता दें कि श्रीकृष्ण के नामों में से एक नाम दामोदर भी है। कार्तिक माह में लोग गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान आदि करते हैं।

कार्तिक महीने के दौरान गंगा में स्नान करने की शुरुआत शरद पूर्णिमा के दिन से होती है और कार्तिक पूर्णिमा पर समाप्त होती है। इस पूर्णिमा में जातक को नदी या अपने स्नान करने वाले जल में थोड़ा सा गंगा जल मिलाकर स्नान करना चाहिए और इसके बाद भगवान विष्णु का विधिवत पूजन करना चाहिए।पूरे दिन उपवास रखकर एक समय भोजन करें। गाय का दूध, केला, खजूर, नारियल, अमरूद आदि फलों का दान करना चाहिए। ब्राह्मण, बहन, बुआ आदि को कार्तिक पूर्णिमा के दिन दान करने से अक्षय पुण्य मिलता है।


कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन वृषोसर्ग व्रत रखा जाता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान कार्तिकेय और भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान हैं। यह व्रत शत्रुओं का नाश करने वाला माना जाता है। इसे नक्त व्रत भी कहा जाता है।इस दिन ब्रह्मा जी का ब्रह्मसरोवर पुष्कर में अवतरण भी हुआ था। अतः कार्तिक पूर्णिमा के दिन पुष्कर स्नान, गढ़गंगा, उज्जैन, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार और रेणुका तीर्थ में स्नान दान का विषेश महत्व माना जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व :

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान, दीप दान, हवन, यज्ञ करने से सांसारिक पाप और ताप का शमन होता है। अन्न, धन एव वस्त्र दान का बहुत महत्व बताया गया है, इस दिन जो भी आप दान करते हैं उसका आपको कई गुणा लाभ मिलता है। मान्यता यह भी है कि आप जो कुछ आज दान करते हैं वह आपके लिए स्वर्ग में सरक्षित रहता है जो मृत्यु लोक त्यागने के बाद स्वर्ग में आपको प्राप्त होता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों में वर्णित है कि महर्षि अंगिरा ने स्नान के प्रसंग में लिखा है कि यदि स्नान में कुशा और दान करते समय हाथ में जल व जप करते समय संख्या का संकल्प नहीं किया जाए तो कर्म फल की प्राप्ति नहीं होती है। शास्त्र के नियमों का पालन करते हुए इस दिन स्नान करते समय पहले हाथ पैर धो लें फिर आचमन करके हाथ में कुशा लेकर स्नान करें, इसी प्रकार दान देते समय में हाथ में जल लेकर दान करें। आप यज्ञ और जप कर रहे हैं तो पहले संख्या का संकल्प कर लें फिर जप और यज्ञादि कर्म करें।

नारद पुराण के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन स्नान आदि कर उपवास रखते हुए भगवान कार्तिकेय की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। इसी दिन प्रदोष काल में दीप दान करते हुए संसार के सभी जीवों के सुखदायक माने जाने वाले वृषोसर्ग व्रत का पालन करना चाहिए।

इस दिन दीपों का दर्शन करने वाले जंतु जीवन चक्र से मुक्त हो मोक्ष को प्राप्त करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन अगर संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्थान करना चाहिए। कार्तिक पूर्णिमा के दिन चंद्र उदय के बाद वरुण, अग्नि और खड्गधारी कार्तिकेय की गंध, फूल, धूप, दीप, प्रचुर नैवेद्य, अन्न, फल, शाक आदि से पूजा कर हवन करना चाहिए।

इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन करवा कर उन्हें दान देना चाहिए। घर के बाहर दीप जलाना चाहिए और उसके पास एक छोटा सा गड्ढा खोदकर उसे दूध से भरना चाहिए। गड्ढे में मोती से बने नेत्रों वाली सोने की मछली डालकर उसकी पूजा करते हुए “महामत्स्याय नमः” मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। पूजा के बाद सोने की मछली को ब्राह्मण को दान कर देनी चाहिए।

दान का महत्व :

  • पूर्णिमा की रात्रि में व्रत करके वृष (बैल) दान करने से शिव पद प्राप्त होता है।
  • गाय, हाथी, घोड़ा, रथ, घी आदि का दान करने से संपत्ति बढ़ती है।
  • इस दिन मेष (भेड़) दान करने से ग्रहयोग के कष्टों का नाश होता है।
  • इस दिन कन्यादान से ‘संतान व्रत’ पूर्ण होता है।

 

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