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Third Front : कौन होंगे चेहरे अभी तक Suspense

Third Front : कौन होंगे चेहरे अभी तक Suspense

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धर्मशाला। आम आदमी पार्टी यानी आप हिमाचल प्रदेश में एक सशक्त तीसरे मोर्चे का दावा लंबे समय से करती आ रही है। चुनाव में अब, जबकि कुछ माह का ही समय शेष है, लेकिन अभी तक आप में कौन-कौन प्रत्याशी होंगे यह तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। कुछ समय पहले आप ने हिमाचल में सरगर्मियां तेज कीं, लेकिन अचानक से सबकुछ बंद हो गया। अब आप की तरफ से धरने प्रदर्शन तो दूर की बात है कोई बयान तक जारी नहीं हो रहा।


  • आप का झंडा लेकर चलने वाले सुशांत भी हुए शांत
  • क्या पंजाब में अपनी सफलता के हिसाब से चुनावी तैयारी करेगी आप
  • हिमाचल में कांग्रेस बीजेपी के असंतुष्टों का सहारा बनकर न रह जाए आप

पूर्व सांसद राजन सुशांत को पहले पार्टी ने प्रदेश संयोजक के रूप में पेश किया और सुशांत भी पूरे जोश के साथ आप का प्रचार करते हुए कांग्रेस और बीजेपी को कोसते नजर आए। इसके बाद एकाएक सुशांत भी खामोश हो गए और पार्टी की गतिविधियों पर भी विराम सा लग गया।गाहे बगाहे कई स्वयंभू नेता आप के नाम पर राजनीतिक बयानबाजी करते रहे, लेकिन अब वो भी कहीं नजर नहीं आ रहे। अब ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि पंजाब में हुए चुनावों के परिणाम देखने के बाद ही हिमाचल में आप अपनी रणनीति तय करेगी।

मौन साधना के लिए जब अरविन्द केजरीवाल हिमाचल आए थे तो उन्होंने भी यही कहा था कि पार्टी पहले पंजाब में अपनी जड़ें जमाएगी और उसके बाद हिमाचल पर फोकस करेगी। यदि यही पार्टी की नीति है तो फिर आप के सहारे अपनी नैया पार लगाने वालों को मार्च माह तक सब्र के घूंट पीना ही होगा। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि प्रदेश बीजेपी और कांग्रेस में असंतुष्ट चल रहे नेता आप का दामन थाम सकते हैं। हालांकि आप के प्रदेश प्रभारी किशोर झा यह कह चुके हैं कि प्रदेश में आप को असंतुष्टों की पार्टी नहीं बनने दिया जाएगा। लेकिन झा ने इस बात के भी संकेत दिए थे की बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के कुछ नेता उनसे संपर्क साधे हुए हैं। उनका यह भी कहना था कि असंतुष्टों में भी उन्हीं नेताओं को पार्टी में जगह मिलेगी जिनका दामन साफ़ होगा और जीतने का दम भी रखते होंगे। ऐसे में यही लग रहा है कि आप कांग्रेस और बीजेपी से टिकट नहीं मिलने वाले नेताओं के सहारे पहाड़ फतह करने की फिराक में है। पार्टी भी खामोश है और पार्टी का झंडा बुलंद करने वाले भी, अब देखना यह है कि कब आप फिर से प्रदेश में सक्रिय होती है। जब भी यह सक्रिय होगी तब दोनों प्रमुख दलों पर आरोपों की बौछार जरूर होगी। 

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