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नर्सिंग डे पर सतत सेवा की शपथ

why we celebrate Nursing day

नर्सिंग डे पर सतत सेवा की शपथ

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स्वास्थ्य के प्रति नर्सों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। नर्सिंग को विश्व के सबसे बड़े स्वास्थ्य से जुड़े पेशे के रूप में माना जाता है। किसी भी मरीज की देखभाल करने में सेवा, स्नेह और तत्परता की आवश्यकता होती है। इसका छोटा सा स्वरूप पारिवारिक माहौल में भी देखा जा सकता है। परंतु बड़े पैमाने पर हम इसे हॉस्पिटल में देखते हैं। विश्व भर में अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस 12 मई को मनाया जाता है। यह दिन नोबल नर्सिंग की सेवा करने वाली फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्म दिवस पर आयोजित होता है।

Nursing dayनर्स दिवस मनाने का प्रस्ताव सबसे पहले अमेरिका की स्वास्थ्य शिक्षा और कल्याण विभाग की अधिकारी डोरोथी सदरलैंड ने रखा और अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहॉवर ने इसे मान्यता प्रदान की। इस दिवस को पहली बार 1953 में मनाया गया। हालांकि अंतरराष्ट्रीय नर्स परिषद ने इसे पहली बार 1965 में मनाया। इस दिवस को अमेरिका और कनाडा में पूरे सप्ताह मनाया जाता है। वहां विभिन्न गतिविधियां चलती हैं तथा शैक्षिक विचार गोष्ठियां आयोजित होती हैं। लंदन में जलती मोमबत्तियां लेकर नर्सें मार्च करती हैं। आम तौर पर यह कार्यक्रम फ्लोरेंस नाइटिंगेल की समाधि की जगह मार्ग्रेट चर्च में मनाया जाता है।

Nursing dayकिसी भी नर्स को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक स्तर जैसे पहलुओं के माध्यम से रोगी की देखभाल के लिए अच्छी तरह प्रशिक्षित होना चाहिए और यह प्रशिक्षण उन्हें उनका शिक्षण संस्थान देता है। इसीलिए जब डॉक्टर्स व्यस्त होते हैं तो ऐसे में रोगियों की देखभाल के लिए नर्स वहां होती है। वे रोगियों का मनोबल बढ़ाती हैं तथा अपने स्नेह पूर्ण व्यवहार से उनकी बीमारी को नियंत्रित करने में सहायक होती हैं। इसलिए अगर देखें तो चिकित्सा से जुड़ा नर्सिंग का विभाग हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। चिंता की बात है कि इस समय दुनिया भर में नर्सों की कमी चल रही है।

विकसित देश दूसरे देशों से नर्सों को बुलाकर अपनी कमी पूरी कर लेते हैं। वे उन्हें अच्छा वेतन और सुविधाएं देते हैं। इसके विपरीत विकास शील देशों में नर्सों को अच्छे वेतन और सुविधाओं की कमी रहती है और भविष्य का कोई बेहतर स्कोप भी नहीं दिखता। इसलिए नर्सें उनके बुलावे पर चली जाती हैं। भारत में भी प्रशिक्षित नर्सों की कमी चल रही है। साथ ही रोगियों और नर्सों के अनुपात में भी अंतर बढ़ा है। फिलहाल अब सरकारी वेतन और अन्य सुविधाएं मिलने लगी हैं इससे नर्सों का पलायन काफी रुका है । उन्हें आप सिस्टर कहें या उपचारिका, वे हर वक्त बीमार, घायल और बुजुर्गों की सेवा के लिए तत्पर रहती हैं। नर्स अस्पताल का एक अभिन्न हिस्सा हैं। उनके कार्य और साहस के लिए भारत सरकार परिवार-कल्याण मंत्रालय ने भी फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार देना शुरू किया गया है ये पुरस्कार राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किए जाते हैं। इसमें 50 हजार रुपए, एक प्रशस्ति पत्र और मेडल दिया जाता है।

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