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कोरोना से हुई थी पति की मौतः पत्नी ने मुखाग्नि दी और पीपल के पेड़ के नीचे तेहरवीं भी की

कोरोना के बढ़ते तांडव से 24 वर्षीय विवाहिता ने झेला सामाजिक नजरिए का दंश

कोरोना से हुई थी पति की मौतः पत्नी ने मुखाग्नि दी और पीपल के पेड़ के नीचे तेहरवीं भी की

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मंडी। कोरोना( corona) के कहर से इस समय पूरा देश जूझ रहा है। इस जानलेवा वायरस के संक्रमण फैलने का डर लोगों में इनता ज्यादा है कि वह किसी के अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं हो रहे हैं। जिले की बल्ह तहसील के कैंहचडी गांव में कुछ ऐसा वाक्या सामने आया। यहां एक 31 वर्षीय युवक की कोरोना से मौत ( Death)हो गई। गांव को पहले से कंटेनमेंट जोन घोषित कर रखा था। दुख इस बात है कि युवक की अर्थी को कंधा देने के लिए भी चार लोग तक नसीब नहीं हुए। इसके बाद पत्नी ने किसी तरह कुछ रिश्तेदारों की मदद से शव को श्मशानघाट पहुंचाया और शादी का लाल जोड़ा पहनकर खुद ही पति की चिता को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। शुक्रवार को युवक की तेरहवीं पत्नी ने गांव के खुले स्थान पर पीपल के पेड़ खुद की। हालांकि इस दौरान कोविड नियमों ( Covid rules) का उसने बखूबी पालन किया और सामाजिक दूरी कायम रखी।

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पटियाला अस्पताल में कोरोना से हुई थी युवक की मौत

31 वर्षीय युवक अजीत सेन की पंजाब के पटियाला अस्पताल में कोरोना से मौत हो गई थी। लेकिन पति की मौत पर 24 वर्षीय इंजीनियर अनु सेन का हौंसला नहीं टूटा। अजीत सेन चंडीगढ़ की एक निजी कंपनी में मैनेजर की नौकरी करता था। गत 18 अप्रैल को उसे हल्की खांसी की शिकायत हुई, जिसके लिए उसने चंडीगढ़ के अस्पताल में उपचार लेना चाहा, लेकिन डॉक्टरों ने उसे कोरोना टेस्ट करने की सलाह दी। जिस पर वह कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद वह अपने किराए के मकान में आइसोलेट हो गया। 24 अप्रैल को होम आइसोलेशन में उसकी तबीयत बिगड़ गई और ऑक्सीजन का स्तर गिर गया। पत्नी अनु सेन ने पति को चंडीगढ़ के ठगोली अस्पताल में भर्ती करवाया,


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जहां तबीयत में सुधार नहीं होने से उसे मोहाली रैफर किया गया। लेकिन वहां के डॉक्टरों ने अजीत सेन को पटियाला के एक बड़े अस्पताल में रैफर कर दिया, जहां 25 अप्रैल को पटियाला अस्पताल के वेंटिलेटर में उपचार के दौरान उसके पति की मौत हो गई। पत्नी अनु सेन सने हिम्मत नहीं हारी। पति का शव लेकर पटियाला से गांव तक ले आयी। वहां कोरोना महामारी के बीच उसने रिश्तेदारों और आसपड़ोस के लोगों के नजरिए का दंश झेला। जहां शव यात्रा में शामिल होने के लिए गांव से लेकर प्रशासन का एक भी आदमी नहीं आया। शव जलाने के लिए कुछ ग्रामीणों ने जरूर मदद की लेकिन वे भी लकडि़यां घाट पर छोड़ कर शव आने के बाद गायब हो गए।

पंचायत व प्रशासन ने नहीं की कोई मदद

अजीत सेन के पिता प्रकाश सेन ने बताया कि बेटे के अंतिम संस्कार के लिए पंचायत और प्रशासन ने उनकी कोई मदद नहीं की। वर्षों तक देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सेवानिवृत नायब सूबेदार के साथ यह अमानवीय व्यवहार उन्हें अंदर से कचोट रहा है। उन्होंने बताया कि बेटे के मृत होने की सूचना प्रशासन को दी गई थी लेकिन प्रशासन की ओर से शव जलाने के लिए लोग नहीं भेजे गए। केवल चार पीपीई किट भेजी गई उनमें भी खामियां थी। पिता ने इस व्यवहार के लिए गहरा दुःख व्यक्त किया है और उन लोगों का आभार जरूर व्यक्त किया जिन्होंने हौसला दिखाकर चिता के लिए लकड़ी मुहैया करवाई।

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