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जानिए, क्या फिर से रखें जाएंगे वाटर कैरियर, कौन चलाएगा प्री-नर्सरी क्लासें

जानिए, क्या फिर से रखें जाएंगे वाटर कैरियर, कौन चलाएगा प्री-नर्सरी क्लासें

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मंडी। सरकार ने जिन प्री-नर्सरी कक्षाओं की शुरूआत की, उनके सही संचालन के लिए अभी तक सरकार ने कोई रूपरेखा नहीं बनाई है। सरकार अब यह विचार कर रही है कि प्राइमरी स्कूलों में शुरू की गई प्री-नर्सरी की कक्षाओं का दो विभागों के माध्यम से संचालन किया जाए। इस बात के संकेत शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने दिए हैं। गुरुवार को सुरेश भारद्वाज मंडी में एक सरकारी समारोह में शामिल होने यहां आए हुए थे।

बता दें कि इन दिनों प्रदेश भर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सरकारी स्कूलों में शुरू की जा रही प्री-नर्सरी कक्षाओं के विरोध में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रही हैं और यह मांग उठा रही हैं कि इन कक्षाओं को आंगनवाड़ी केंद्रों में संचालित किया जाए, नहीं तो आंगनवाड़ी केंद्रों का भविष्य अंधकार में जा सकता है। ऐसे में मंडी पहुंचे शिक्षा मंत्री ने कहा अभी प्री-नर्सरी कक्षाओं के सही संचालन की रूपरेखा नहीं बनाई जा सकी है, जिन स्कूलों में प्री-नर्सरी की कक्षाएं शुरू हुई हैं, वहां के मौजूदा अध्यापकों को ही इसकी अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।


सरकार यह विचार कर रही है शिक्षा और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त प्रयासों से प्री-नर्सरी कक्षाओं का संचालन हो सके। लेकिन, प्री-नर्सरी कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाएगा कौन, अध्यापक रखे जाएंगे या नहीं, या फिर किसे अध्यापक नियुक्त किया जाएगा, इन सब बातों पर अभी निर्णय लिया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि अभी इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है और जल्द ही पूरी रूपरेखा बनाकर इसका विस्तार किया जाएगा। बता दें कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के 3391 प्राइमरी स्कूलों में प्री-नर्सरी कक्षाएं शुरू होनी हैं।

वहीं शिक्षा मंत्री ने प्राइमरी स्कूलों में वाटर कैरियर की नियुक्ति को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पूर्व सीएम शांता कुमार ने इसकी शुरूआत की थी और इसमें विधवा, दिव्यांगों और अन्य जरूरतमंदों को पहले अस्थायी और बाद में स्थायी नौकरी दी जाती थी, लेकिन कोर्ट के आदेशों के बाद अब यह प्रक्रिया बंद हो गई है।

उन्होंने कहा कि यह वाटर कैरियर स्कूलों में साफ-सफाई की उचित व्यवस्था कर देते थे, लेकिन अब इनकी नियुक्ति न होने के कारण स्कूलों में अलग से सफाई कर्मचारी रख पाना संभव नहीं हो पा रहा है, क्योंकि सरकार के पास अलग से सफाई कर्मचारी रखने का बजट नहीं है। उन्होंने कहा कि वाटर कैरियर स्कूलों में फिर से रखे जाएं, इसके लिए सरकार जल्द ही नई नीति बनाने जा रही है।

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