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नारीशक्ति : Corona ने ले ली पति की जान, गांव को बचाने तीन बच्चों के साथ बाग में रह रही महिला

नारीशक्ति : Corona ने ले ली पति की जान, गांव को बचाने तीन बच्चों के साथ बाग में रह रही महिला

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लखनऊ। कोरोना महामारी ने कई लोग से उनका जीवन छीन लिया तो कुछ लोगों से जीने का सहारा फिर भी लोग इससे जंग में जुटे हुए हैं। कुछ ऐसा ही हाल है अयोध्या (Ayodhya) के इनायतनगर थाना क्षेत्र के ग्राम घुरेहटा में रहने वाली एक महिला का। कोरोना के कहर में अपने पति को खो चुकी महिला अब अपने गांव को बचाने के लिए अपने तीन बच्चों के साथ बाग में क्वारंटाइन होकर रह रही है। पति (Husband) की मौत के बाद शोक में डूबी महिला का कहना है कि पति तो इस दुनिया से चले गए, लेकिन मेरा गांव और घर तो बचना चाहिए।

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इनायतनगर थाना क्षेत्र के ग्राम घुरेहटा निवासी कालीदीन का अकेला पुत्र राजकुमार (30) अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दिल्ली (Delhi) में रह कर जीवनयापन करता था, लेकिन कोरोना ने उनके हंसते खेलते परिवार को तबाह कर दिया। शुक्रवार को युवक राजकुमार की मौत हो गई। बताते हैं कि दिल्ली में राजकुमार करीब एक पखवाड़े तक कोरोना से जंग लड़ रहा था। इसके बाद महिला खुद ही बाग में शिफ्ट हो गई। उसने कहा कि जब तक मेरी जांच रिपोर्ट (Test report) नहीं आ जाती तब तक मैं अपने गांव में नहीं जाउंगी। बाग में चारपाई पर आशा कुमारी (27) अपने तीन छोटे-छोटे बच्चों पुत्र रितेश कुमार (9), पुत्री रितिका (6), पुत्र ऋषभ डेढ़ वर्ष के साथ जिंदगी गुजार रही है। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ, डीएन द्विवेदी ने बताया कि महिला आशा देवी व उनके तीन बच्चों का सैंपल अभी लिया जाना है।

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दिल्ली से अयोध्या आए युवक, खेत में हो गए क्वारंटीन

वहीं, दिल्ली से आए खंडासा क्षेत्र के इछोई गांव निवासी दो युवकों ने खुद को खेत में क्वारंटाइन कर रखा है। स्थानीय लोग इनके संयम की काफी प्रशंसा कर रहे हैं। इछोई गांव निवासी अमरदीप शुक्ला व गणेश दुबे लॉकडाउन में दिल्ली में फंसे थे। 17 मई की रात लगभग एक बजे दोनों जगदीशपुर पहुंचे। जहां से पुलिस ने इनको मिल्कीपुर तक के लिए ट्रक में बैठा दिया। गांव के समीप पहुंचकर उन्होंने अपने परिवार वालों को सूचना दी। उनके परिवार वालों ने इनके लिए पास में ही स्थित बगीचे में सारी व्यवस्थाएं उपलब्ध करवा दी। दिन भर तो ये लोग उस बगीचे में रहते हैं और शाम होते ही अपने मक्के के खेत के पास चले जाते हैं। छह दिन से यह लोग ऐसे ही रह रहे हैं। इनका कहना है कि क्वारंटाइन के 14 दिन पूर्ण हो जाने पर ही ये अपने घर जाएंगे और तभी अपने परिवार से मिलेंगे।

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