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हक को हल्ला : सरकार-श्रम बोर्ड के खिलाफ मजदूरों का धरना-प्रदर्शन

हक को हल्ला : सरकार-श्रम बोर्ड के खिलाफ मजदूरों का धरना-प्रदर्शन

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Workers Protest: शिमला। सरकार और श्रम कल्याण बोर्ड के खिलाफ मजदूर भड़क गए हैं। मंगलवार को प्रदेश भर दर्जनों मजदूर सचिवालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। मजदूरों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और श्रमिक कल्याण बोर्ड से उनकी मांगों पर ध्यान देने की मांग की। मजदूरों ने आरोप लगाया कि राज्य की कांग्रेस सरकार और श्रमिक कल्याण बोर्ड मजदूरों की मांगों को पूरा करने में पूरी तरह अड़ियल रवैया अपनाए हुए हैं। इस कारण मजदूरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सचिवालय के बाहर लगाए नारे, सड़कों को किया जाम

माकपा के मजदूर संगठन सीटू के बैनर तले जुटे निर्माण मजदूरों ने पंचायत भवन के बाहर एकत्र होकर राज्य सचिवालय की ओर कूच किया। मजदूर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सचिवालय की ओर बढ़े। सीटू के 47वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान हजारों की तादाद में मजदूर जुटे और सचिवालय के बाहर लाल झंडे लहराते हुए नजर आए। इस मौके पर सीटू के राज्य महासचिव प्रेम गौतम ने कहा कि हजारों की संख्या में यहां मजदूर अपना हक मांगने आए हैं। मजदूरों को उसका न्यूनतम वेतन दिया जाए और इस मांग को वे पूरी करवा के रहेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मजदूरों को कुचलने में लगी हैं।


समान काम, समान वेतन की मांग

सीटू के राज्य अध्यक्ष जगत राम ने कहा कि समान काम का समान वेतन दिया जाए और न्यूनतम वेतन लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि मीड डे मील वर्कर को पूरा वेतन मिले और उन्हें नियमित किया जाए। उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग ने न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपए करने तो कहा है लेकिन यह नहीं दिया जा रहा। उन्होंने निर्माण मजदूरों की मांगों को भी उठाया। जगत राम ने कहा कि दिसंबर 2016 में श्रमिक कल्याण बोर्ड की बैठक में पंजीकृत निर्माण मजदूरों को दी जाने वाली वित्तीय सुविधाओं में बढ़ोतरी करने की स्वीकृति प्रदान की गई थी, लेकिन आज तक इस बढ़ोतरी को लागू नहीं किया गया। इसके साथ-साथ पंजीकृत मजदूरों को मिलने वाली वित्तीय व अन्य सुविधाओं का सालों तक भुगतान नहीं किया जाता।

औऱ बंद कर दिए सचिवालय के गेट

मजदूरों के राज्य सचिवालय पहुंचने पर सचिवालय के गेट बंद कर दिए थे। छोटा शिमला से सचिवालय की तरफ की सड़क पर मजदूर बैठे थे और इस कारण यातायात को भी बंद कर दिया गया था। ऊपरी शिमला और संजौली की ओर से आने वाले वाहनों को लक्कड़ बाजार से भेजा जाने लगा।

 

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