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मंथनः ऐसे हालात रहे तो एक दिन पानी के लिए दूसरे देशों में जाना पड़ेगा

मंथनः ऐसे हालात रहे तो एक दिन पानी के लिए दूसरे देशों में जाना पड़ेगा

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पीटरहॉफ में जलसंरक्षण पर आयोजित कार्यशाला में जुटे दिग्गज नेता, पानी के संरक्षण को लेकर चर्चा

शिमला। प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर प्रयास तेज हो गए हैं। शिमला के पीटरहॉफ में जल संरक्षण पर आयोजित कार्यशाला में सत्ता पक्ष और विपक्ष पानी के महत्व को लेकर गंभीर दिखे। बहरहाल, मंगलवार रात को आय़ोजित इस कार्यशाला में सीएम जय राम ठाकुर, स्पीकर डॉ राजीव बिंदल, waterman राजिंदर सिंह, महाराष्ट्र जल विरादरी के नरेंद्र चुघ, मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक इस कार्यशाला में मौजूद। डॉ बिंदल ने इस अवसर पर कहा कि हमे अपने प्रदेश में पानी का संरक्षण कैसे करना है ये वाटर मैन राजिंदर सिंह और नरेंद्र चुघ जैसे लोगों से सीखना चाहिए, जिन्होंने देश मे जल संरक्षण के ज़रिए क्रांतिकारी परिणाम सामने लाएं है, जबकि महाराष्ट्र जल बिरादरी के अध्यक्ष नरेंद्र चुघ ने महाराष्ट्र में जल संरक्षण और किए गए प्रयासों, नदी पुनर्जीवन के लिए किए कामों का अपना अनुभव सांझा किया। चुघ ने बताया कि नदियां बहते हुए नेचुरल लॉ का संदेश देती हैं। मानव जाति को नदियों के आचरण को अपने जीवन मे ढालना चाहिए। उधर, वाटर मैंन राजिंदर सिंह ने बताया अगर हम अभी नहीं जागे तो वह दिन दूर नहीं जब हमसब को दूसरे देशों में पानी के लिए शरण लेनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल देश में सबसे अधिक बारिश वाले खुशनसीब राज्यों में हैं, जहां सबसे ज्यादा बारिश होती है, लेकिन समय के साथ प्रदेश के करीब 70 % चश्मे सुख चुके हैं। सौभाग्य से प्रदेश में 1600 मिलीमीटर बारिश होती है लेकिन बारिश के पानी के संग्रहण नहीं होने की वजह से सारा पानी और उपजाऊ मिट्टी बह कर बाहर चली जाती है।

बारिश के पानी को दोबारा जमीन में डालना होगा

हिमाचल में पानी के चश्मे पुर्नजीवित करने के लिए बारिश के पानी को दोबारा ज़मीन के भीतर डालना होगा। नदियों को अकाल मृत्यु से बचना होगा। इस मौके पर मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि ज़मीन को कैसे रिचार्ज किया जाए ये सबसे बड़ी चुनौती है, पहाड़ों में बारिश के दिनों में ज़रूर नदियां उफान पर होती है, लेकिन सारा पानी बह कर नीचे चला जाता है। वहीं सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि पानी का संरक्षण आज की सबसे बड़ी चिंता भी है और चुनौती भी। इस सामयिक विषय को समझने के लिए जिस तरह से वाटरमैन के नाम से मशहूर डॉ राजेन्द्र सिंह जैसे जल संरक्षण में अग्रणी विभूतियों का संदेश सभी को अपने जीवन में ढालना आज वक्त की नजाकत है। डॉ राजिंदर को राजस्थान जैसे मरुस्थल में पानी को लेकर क्रांति लाना और जल संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने में योगदान सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। आज ज़रूरी है कि हम सब हिमाचली पहाड़ों नदी नालों और यहां के पर्यावरण के महत्व को समझे। वक्त आ गया है कि बहते हुए पानी को बर्बाद होने से बचाया जाए, जल संरक्षण और जल प्रबधंन को लेकर सरकार कृतसंकल्प है। सभी विद्यायकों को समझने के साथ इस दिशा में जनता के बीच संदेश देने का काम करें। सीएम ने डॉ राजेन्द्र सिंह को हिमाचल में इस प्रयास में सहयोग के लिए आमंत्रित किया।

https://youtu.be/cPprtXy7XgE

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