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विश्व एड्स दिवस : जागरुकता बहुत जरूरी है

विश्व एड्स दिवस : जागरुकता बहुत जरूरी है

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एड्स ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी (एचआईवी) वायरस के संक्रमण के कारण होने वाला महामारी का रोग है। पूरी दुनिया में हर साल आज का दिन लोगों को एड्स  के बारे में जागरूक करने के लिये मनाया जाता है। यह दिन सरकारी संगठनों, गैर सरकारी संगठनों, नागरिक समाज और अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा एड्स से संबंधित भाषण या सार्वजनिक बैठकों में चर्चा का आयोजन करके मनाया जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति ने साल 1995 में विश्व एड्स दिवस के लिए एक आधिकारिक घोषणा की जिसका अनुकरण दुनिया भर में अन्य देशों द्वारा किया गया।
विश्व एड्स दिवस समारोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य दिवस समारोह बन गया है। यह स्वास्थ्य संगठनों के लिए लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने, इलाज के लिये संभव पहुंच के साथ-साथ रोकथाम के उपायों पर चर्चा करने के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। शुरू के सालों में, विश्व एड्स दिवस के विषयों का ध्यान बच्चों के साथ साथ युवाओं पर केन्द्रित था, जो बाद में एक परिवार के रोग के रूप में पहचाना गया, जिसमें किसी भी आयु वर्ग का कोई भी व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित हो सकता है। भारत में HIV इंफेक्शन के नए मामलों में 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है पर फिर भी यहां नए मरीज का प्रतिशत एशिया-पेसिफिक रीजने में पनपने वाले नए मामलों का 38 प्रतिशत है। भारत में HIV के करीब 64 प्रतिशत मरीजों को एंटीरेट्रोवियल थेरेपी से इलाज नहीं मिल पाता।
इस बीमारी की चपेट से लोगों को बचाने के लिए सरकार द्वारा तरह-तरह के कार्यक्रम चलाये जाते रहे हैं और लोगों को जागरुक किया जा रहा है, इन्हीं में से एक है एडल्ट वैक्सीनेशन।  लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च ने इसके बारे में एक चौकाने वाली बात सामने आई है कि 68 प्रतिशत भारतीयों को एडल्ट वैक्सीनेशन के बारे में मालूम नहीं है। इस अध्ययन में शामिल हुए ज़्यादातर लोगों को सिर्फ यही मालूम है कि टीकाकरण यानी वैक्सीनेशन बच्चों के लिए ही होता है। साल 1985 में टीकाकरण कार्यक्रम देशभर में शुरु किया गया था जो टीबी, टेटनस, डिप्थीरिया, पोलियो और खसरे से निपटने के लिए था। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अनुसार, जब एक वयस्क व्यक्ति के लिए टीकाकरण की आवश्यकता समाप्त नहीं होती है। एक बच्चे के रुप में प्राप्त टीकों से कुछ ही वर्षों तक सुरक्षा मिलती है और नए विभिन्न रोगों के जोखिम से निपटने के लिए और वेक्सीनेशन की जरूरत पड़ती है। एडल्ट वेक्सीनेशन से हर साल 30 लाख लोगों की सुरक्षा होती है, मृत्यु दर कम होती है और चिकित्सा लागत में कमी आती है। फ्लू वैक्सीन की वजह से अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में 70 फीसदी कमी आई है।

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